होली मिलन पर कवि सम्मेलन का आयोजन
बिजनौर, चांदपुर। अग्रवाल सभा के तत्वावधान में आयोजित होली मिलन समारोह में कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
बुधवार शाम सातो इमली स्थित पंचवटी उपवन में राहुल तायल के संचालन में आयोजित होली मिलन समारोह का शुभारंभ सभा के अध्यक्ष नरेश गोयल, लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, अरविंद कुमार मित्तल, अनिल कुमार तेलवाले, कृष्णौतार बैंकर्स ने दीप प्रज्जवलित कर किया।
नैनीताल बाजपुर से आई बाल कवियत्री काव्या श्रीजैन ने कविता सुनाई - अब होलीयूं ही मनाएंगे, गीत भारत के गुनगुनाएंगे। देशहित सरहदों पर लड़ते हैं, उनके हिस्से का रंग लगाएंगे।
संचालन कर रहे नैनीताल के कवि सुरेंद्र जैन ने कहा - सिरमौर हमीं थे क्षत्रिय कुल के हाथों में जब थे हथियार, सिरमौर हमीं थे वैश्य कुल के हाथों में जब है व्यापार, समाजवाद की धारा का प्रथम प्रवाह हमारा था, हम सबके हैं सब अपने हैं यह अग्रसेन का नारा था।
दिल्ली के कवि मोहन मुंतजिर ने कहा - दे दूं्गा दिल उसे अभी वो हाँ अगर कहे, पर जान थोड़ी दूं्गा मुझे जां अगर कहे, महबूब अगर बोले तो छत पर नहीं चढूं, और चांद तोड़ लाऊ मेरी मां अगर कहे।
मेरठ के कवि प्रशांत अग्रवाल की रचना- होली की उमंग भरे मन में तरंग और पीकर के भंग झूमे नाचे और गाइये ने खूब वाहवाही लूटी।
दिल्ली की कवित्री रजनी अवनी की रचना- खुशी होंठो पे आ जाए तो लगता है कि होली है, घटा रंगों की छा जाए तो लगता है कि होली है, जो बंटवारे की बातों से बना दुश्मन तेरा भाई, गले हंस के लगा जाए तो लगता है कि होली है।
राजस्थान के कवि सौरभ सैनी की रचना- हमने थमाई बांसुरी, तब धनुष बाण मांगा गया, हमने थमाई ढाल तब, हमसे कृपाण मांगा गया, जब पूछ बैठे कुछ लोग हमसे राम का प्रमाण, तब उनसे उनके होने का प्रमाण मांगा गया।
चांदपुर की कवित्री उर्वशी कर्णवाल, सुनीता वर्मा ने भी रचनाएं प्रस्तुत कीं।