कालागढ़ कार्बेट पार्क में कर्नाटक से आए हाथी।
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कालागढ़ में कर्नाटक से नौ हाथी कालागढ़ पहुंच गए हैं। हाथियों को 90 दिन तक कालागढ़ में रखकर उन्हें उत्तराखंड राज्य के वातावरण के अनुकूल बनाया जाएगा। कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक अमित वर्मा के अनुसार सभी हाथी सकुशल कालागढ़ पहुंच गए हैं।
कर्नाटक राज्य से पांच दिनों का सफर तय कर कार्बेट टाइगर रिजर्व में नौ हाथी शनिवार की सुबह पहुंचे। हाथियों को कालागढ़ में ऐलीफेंट कैंप में रखा गया है। हाथियों के साथ उनके महावत व अन्य आवश्यक कर्मी भी आए हैं। कार्बेट टाइगर रिजर्व में सुरक्षा को मजबूत करने व गश्त करने के उद्देश्य से मंगाए गए हैं। कालागढ़ में पहुंचते ही हाथियों का मेडिकल जांच कार्बेट टाइगर रिजर्व के डा. दुष्यंत कुमार ने किया। सभी हाथियों को स्वस्थ बताया। कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक अमित वर्मा ने बताया कि हाथी 90 दिनों के लिए कालागढ़ में ही रहेंगे। इस दौरान उनका व्यवहार समझा जाएगा। उनको कार्बेट के हाथियों के अनुसार प्रशिक्षित किया जाएगा। उधर, कालागढ़ कैंप में देहरादून से प्रमुख वन्यजीव संरक्षक डीवीएस खाती, कार्बेट टाइगर रिजर्व के प्रभारी निदेशक धीरज पांडे ने हाथियों के रखरखाव को देखा और गाइड लाइन के अनुसार काम करने को कहा। साथ ही हाथियों को कोई परेशानी न हो इस पर ध्यान देने के निर्देश अधीनस्थ अधिकारियों को दिए। मौके पर मौजूद उप प्रभागीय वनाधिकारी आरके तिवारी व रेंज अधिकारी आरके भट्ट ने हाथियों के आने पर हर्ष जताते हुए इसे कार्बेट के लिए उपलब्धि बताया है।
कर्नाटक राज्य की भाषा समस्या
कालागढ़ में पहुंचे इन हाथियों के साथ कर्नाटक राज्य की भाषा की समस्या आ रही है। इनके महावत दक्षिण भारत की भाषा बोलते हैं तो यह हाथी उसे समझ कर कार्य कर रहे हैं। साथ ही सुबह गुड़ खाकर हाथियों ने कालागढ़ में आंखें खोली। समस्या के समाधान के लिए दुभाषिए भी उनके साथ है।
साथ लाए हैं भोजन
कर्नाटक से आए हाथियों का भोजन चावल है। इनके साथ महावत लगभग एक माह का भोजन लेकर आए हैं। इस दौरान इन हाथियों को स्थानीय भोजन आदि देकर यहां के वातावरण में ढाला जाएगा।
फीमेल की संख्या अधिक
इन नौ हाथियों में पांच मादा व चार नर हाथी हैं। वहीं इनमें दो साल के दो बच्चे भी हैं। जो दोनों ही नर हैं। इन हाथियों को हाथीशाला में स्वीमिंग पुल आदि की सुविधा भी दी जा रही है। बाकायदा बिजली प्रकाश की व्यवस्था भी यहां की गई है।
कड़ी सुरक्षा
कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक अमित वर्मा का कहना है कि हाथियों को कड़ी सुरक्षा में रखा गया है। एक तो वह हिंदी नहीं समझते हैं। दूसरे राज्य से आए है। इनका व्यवहार भी अलग है। फिलहाल उनसे दूर रहना ही बेहतर है। सुरक्षा कारणों से हाथीशाला में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। इसके लिए बाकायदा सशस्त्र कर्मियों को तैनात किया गया है।