बिजनौर में जिले में अर्ली वैरायटी के गन्ने का रकबा बढ़ने का असर दिखाई देने लगा हैं। शुगर मिलों ने अब तक रिकॉर्ड गन्ने की पिराई करके अधिक मात्रा में चीनी बनाईं है। इससे किसानों के गन्ना मूल्य भुगतान में तेजी आई है।
गन्ना विभाग का लक्ष्य अर्ली वैरायटी का रकबा 90 प्रतिशत करने का है।
डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार, जिले में वित्त वर्ष 2013-2014 में गन्ने का रकबा दो लाख नौ हजार हेक्टेअर था। अर्ली वैरायटी का रकबा मात्र नौ प्रतिशत था।
पूरे सीजन में छह करोड़ 64 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई करके 64 लाख क्विंटल चीनी बनी थी। शासन ने अर्ली वैरायटी का रकबा बढ़ाने के लिए अभियान चलाया। इसमें किसानों ने भरपूर सहयोग दिया। अर्ली वैरायटी का रकबा बढ़ाकर 75.3 प्रतिशत हो गया। अब तक पांच करोड़ 82 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई हो गई है। इससे 65 लाख क्विंटल चीनी बनी है। सीजन के आखिर तक 37 लाख क्विंटल चीनी अधिक बनेगी।
इसकी कीमत 1440 करोड़ होगी। ट्रैंच विधि द्वारा अर्ली वैरायटी का गन्ना बोने से किसान व चीनी मिलों को मिलाकर 2090 करोड़ का मुनाफा होगा। इस संबंध में गन्ना समितियों एवं शुगर मिलों को अलग अलग लक्ष्य दिया गया है।