- जैन समाज ने कहा, तथ्यों की जानकारी के बिना धर्म और संत समाज पर टिप्पणी करना उचित नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
नहटौर। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की जैन संत सौरभ सागर महाराज और जैन साधुओं द्वारा उपयोग की जाने वाली मोरपंख की पिच्छी को लेकर की गई टिप्पणी पर नगर के जैन समाज ने नाराजगी जताई है। जैन समाज के लोगों ने टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए माफी की मांग की है।
अखिल भारतीय जैन अल्पसंख्यक महासंघ के नगर अध्यक्ष ऋषभ जैन ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा का सर्वोच्च संदेश देता है और जैन साधु-संत किसी भी जीव को कष्ट पहुंचाने की कल्पना भी नहीं कर सकते। उन्होंने स्पष्ट किया कि पिच्छी मोरों की हत्या कर नहीं बनाई जाती, बल्कि प्राकृतिक रूप से झड़ने वाले मोरपंखों को एकत्र कर पारंपरिक विधि से तैयार की जाती है। इसका उपयोग सूक्ष्म जीवों को बिना नुकसान पहुंचाए हटाने के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि संत सौरभ सागर महाराज समाज में नैतिकता, संयम और सद्भाव का संदेश दे रहे हैं। ऐसे संत के संबंध में तथ्यों की जानकारी के बिना टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों से किसी भी धर्म या संत समाज पर टिप्पणी करने से पहले तथ्य जांचने की अपील की।
जैन समाज ने संबंधित टिप्पणी पर माफी की मांग करते हुए भविष्य में इस प्रकार के बयान देने से बचने की अपील की। इस दौरान डॉ. अंकुर जैन, डॉ. अभिनव जैन, पंकज जैन, संदीप जैन, शरद जैन, व्योम जैन, हर्ष जैन, विनय जैन और आशु जैन सहित अन्य लोग मौजूद रहे।