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सिंचाई का पानी नहीं दे पाएंगे बांध

Sun, 11 Sep 2016 01:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
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रेहड़ के पीलीबांध में पानी है काफी कम। - फोटो : अमर उजाला
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धामपुर  में कुमायुं क्षेत्र में सामान्य से कम बारिश होने का खामियाजा इस बार क्षेत्र के किसानों को उठाना पड़ सकता है। बारिश कम होने से रेहड़ का पीली बांध, कालागढ़ का रामगंगा और उत्तराखंड के जसपुर में स्थित तुमरिया बांध अपनी क्षमता से दो तिहाई खाली है। ऐसे में सिंचाई विभाग के अधिकारियों की चिंता  बढ़ गई है। सिंचाई विभाग की माने तो इस बार भी बारिश होना जरूरी है। यदि नहीं होती  है तो रबी की फसलों की  सिंचाई मुश्किल में पड़ जाएगी।
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अफजलगढ़ सिंचाई खंड धामपुर के तहत रेहड़ क्षेत्र में आने वाला पीली बांध है। इसकी क्षमता 846 फीट है।  दस सितंबर तक बांध में क्षमता के सापेक्ष अभी तक 832 फीट तक पानी है। 
अब तक 840 फीट पानी एकत्रित हो जाना चाहिए था। एक परेशानी यह भी है कि जो पानी बांध में उपलब्ध है, उसमें मानक  के अनुरूप 817 फीट तक का  पानी ही नहरों में सिंचाई के लिए छोड़ा जा सकता है। ऐसा ही हालात कालागढ़ रामगंगा बांध के  भी हैं। रामगंगा बांध की क्षमता  365 मीटर है। इसके मुकाबले पानी का लेबिल 348 मीटर तक ही पहुंचा है।
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एक्सईएन राजीव कपिल शर्मा ने बताया कि उनके खंड में जसपुर  के तुमरिया बांध से भी 81 नहरों  में सिंचाई के लिए  पानी लिया  जाता है। जो 330 किमी लंबी   नहरों के माध्यम से पानी किसानों को दिया जाता है।  इसके अलावा तुमरियां बांध की स्थिति भी सामान्य नहीं है। इस बांध की क्षमता 858 फीट है, जिसके सापेक्ष 831 फीट तक पानी है। नहरों में पानी छोड़ने के लिए कम से कम 822 फीट का लेवल चाहिए।

सितंबर माह सूखा न जाए तो अच्छा
 एक्सईएन के मुताबिक यदि सितंबर माह पिछले महीनों की तरह सूखा रह गया तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी। क्योंकि बांधों में पानी की उपलब्धता केवल बारिश के पानी से ही होती है। अन्य और कोई संसाधन नहीं है। उन्होंने बताया कि  पिछले आंकड़ों को देखा जाए तो वर्ष 2010 में 15 सितंबर को भारी बारिश हुई थी। बारिश ऐसी हुई थी कि क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। अभी 15 से 25 सितंबर तक का बारिश का इंतजार है। यदि बारिश बढ़िया हो जाती है। बांधों में पानी का स्तर बेहतर हो सकता है।
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