-उत्तराखंंड को प्रस्ताव भेजा जा चुका है, भारत सरकार से मिलेगी अनुमति
-अभी तक किसी ने अमानगढ़ के पास नहीं खरीदी जमीन
- एक किलोमीटर रखी गई है इको सेंसेटिव जोन की परिधि
- उत्तराखंड सरकार बाद में प्रस्ताव भारत सरकार को भेजेगी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जब सत्र 2023-24 में इंवेस्टर्स समिट हुआ तो पूरे जिले के लिए 551 एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) साइन हुए थे। इनमें सबसे ज्यादा संख्या अमानगढ़ के पास रिजॉर्ट, कैफेटेरिया, टूरिस्ट स्टे आदि के लिए थे। वहीं, दूसरी ओर अमानगढ़ का इको सेंसेटिव जोन घोषित न होने के कारण निवेशक जमीन खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इको सेंसेटिव जोन का प्रस्ताव शासन की ओर से उत्तराखंड को भेज दिया गया है। वहीं अब भारत सरकार की अनुमति के बाद ही इसकी स्थिति साफ हो पाएगी।
अमानगढ़ में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन अभी तक पर्यटकों के रुकने के लिए वहां रिसॉर्ट या होटल निर्माण नहीं हो पाया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले तीन साल में करीब आठ हजार पर्यटक अमानगढ़ का दीदार कर चुके हैं। ऐसे में वहां पर विकास की संभावना तलाशने पहुंचे लोग इको सेंसेटिव जोन निर्धारित न होने के कारण दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
वन विभाग का कहना है कि उत्तराखंड को इको सेंसेटिव जोन का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, अब वहां से प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाएगा। डीएफओ ज्ञान सिंह ने बताया कि प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय भारत सरकार को लेना है।
रामनगर की तर्ज पर अमानगढ़ के बाहर का क्षेत्र विकसित होगा
अमानगढ़ रेंज कभी कार्बेट पार्क का ही हिस्सा हुआ करती थी। जब यूपी-उत्तराखंड अलग-अलग राज्य बने तो उस समय अमानगढ़ वन रेंज बिजनौर के हिस्से में आई, जबकि कार्बेट पार्क उत्तराखंड में चला गया। अमानगढ़ रेंज का रकबा 9500 हेक्टेयर है। इसमें करीब 8600 हेक्टेयर क्षेत्र टाइगर रिजर्व के तहत आता है। साल 2012 में अमानगढ़ वन रेंज को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला। यहां 32 से ज्यादा बाघ, सौ से ज्यादा हाथी तो देखने को मिलते हैं। वहीं निवेशक रामनगर की तर्ज पर वादीगढ़ से अमानगढ़ के बीच में रिसॉर्ट, कैफेटेरिया आदि बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
कैसे खरीदें जमीन, इको जोन में फंसने की आशंका
पिछले दिनों प्रशासन ने जब जिले में निवेश बढ़ाने के लिए उद्योगपतियों, व्यापारियों और निवेशकों को बुलाया, तब करीब दस एमओयू अमानगढ़ के पास रिसॉर्ट आदि विकसित करने के लिए हुए। ऐसे में निवेशक इको सेंसेटिव जोन घोषित न होने के कारण जमीन नहीं खरीद पा रहे हैं। वहीं वन विभाग का कहना है कि इको सेंसेटिव जोन निर्धारित होने के बाद अमानगढ़ के बाहर विकास बढ़ेगा।
103 इकाइयों को मिली जमीन, शुरू हुआ काम
उपायुक्त उद्योग अमित कुमार ने बताया कि 103 और इकाइयों की स्थापना के लिए जमीन मिल गई है। भूमि पूजन कर निर्माण कार्य शुरू हो गई है। ये इकाई 2456.35 करोड़ से स्थापित होंगी, जिनसे 7013 लोगों के लिए रोजगार सृजन होगा।
जिले में साइन हुए करोड़ों के एमओयू
इकाई- निवेश करोड़ रुपये में
पर्यटन- 1155
उद्यान क्षेत्र- 1286
हैंडलूम- 420
वन विभाग- 293
ऊर्जा क्षेत्र- 593
चिकित्सा शिक्षा- 261
डेयरी डवलपमेंट- 239
चीनी गन्ना उद्योग- 740
कृषि- 60
पशुपालन- 257
एमएसएमई- 743
आबकारी- 1325
उच्च शिक्षा- 200
इंडस्ट्रियल डवलपमेंट- 609
हाउसिंग एंड डवलपमेंट- 861
यूपीसीडा- 2018
नोट: निवेश करोड़ रुपये में है और जानकारी विभाग से ली गई है।