-औषधि निरीक्षक ने दो दवाइयों के नमूने नकली मिलने पर कोर्ट में दायर किया वाद
-दवाइयों का पता ढूंढने गए औषधि निरीक्षक, खाली हाथ लौटे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। जिले में आए दिन दवाइयों के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। ऐेसे में अब एक महीने दो दवाइयों के नमूने जांच में नकली पाए गए। वहीं, मेडिकल स्वामी औषधि निरीक्षक को दवाइयों के बिल नहीं दिखाए पाए। औषधि निरीक्षक ने मेडिकल स्वामियों सहित अन्य लोगों के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर किया है।
औषधि निरीक्षक उमेश कुमार भारती ने मंडावर क्षेत्र के दयालवाला स्थित आरके मेडिकल स्टोर से तीन मई 2025 को वोरसेफ-200 एलबी टेबलेट (सेफिक्सिम व लेक्टिक एसिड बेसिलस) का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा था। मेडिकल स्टोर संचालक रोहित कुमार पुत्र लक्ष्मीचंद निवासी मीरावाला खारपुर, थाना ककरौली, तहसील जानसठ, मुजफ्फरनगर इसका कोई बिल नहीं दिखा पाया।
15 जुलाई को इसकी जांच रिपोर्ट आई। जांच में दवा नकली पाई गई। इसमें कोई साल्ट नहीं था। जिसके बाद औषधि निरीक्षक दवा की पैकिंग पर लिखित निर्माता कंपनी वोमेक केयर, इंडस्ट्रियल एरिया, हरिद्वार रोड, देहरादूनके पते पहुंचे। लेकि, यह निर्माजा कंपनी कहीं नहीं मिली। कैमिस्ट और कंपनी को नोटिस भी जारी किए गए। लेकिन, कोई जवाब नहीं मिला। जिसके चलते बुधवार को औषधि निरीक्षक ने कैमिस्ट व संबंधित कंपनी के विरुद्ध सीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया।
जुलाई में भी कोर्ट में दायर कराया था वाद
औषधि निरीक्षक की ओर से नजीबाबाद के फरमान ड्रग स्टोर से लिया गया आरकूल-डीएसआर कैप्सूल (रेबिप्राजोल व डोमपेरिडोन) का नमूना जांच में नकली पाए जाने पर बीती 25 जुलाई को वाद दर्ज कराया गया था।
वर्जन::
आरके मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निरस्त किए जाने की प्रक्रिया के तहत पत्र भेज दिया गया है। दवाई जांच नकली या फेल आने पर कार्रवाई की जाएगी। कैमिस्ट और उपभोक्ता दवाई लेने पर बिल जरूर लें। बिना बिल दवाई न खरीदें। - उमेश भारती, औषधि निरीक्षक, बिजनौर