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यूजीसी के नए नियम सभी शिक्षण संस्थानों में लागू करें : चंद्रशेखर

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धामपुर। नगीना लोकसभा क्षेत्र के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने आईआईटी, आईआईएम, एआईआईएमएस में भेदभाव रोकने को केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र भेजा है। सांसद ने उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए यूजीसी नियमों को यूजीसी से मान्यता प्राप्त संस्थानों तक सीमित न रखा जाए बल्कि आईआईटी, आईआईएम, एआईआईएमएस में सहित सभी केंद्रीय, स्वायत्त उच्च शिक्षण संस्थानों में इसे अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए।
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केंद्रीय मंत्री को भेजे पत्र में सांसद ने कहा है कि देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आज भी जाति, वर्ग और सामाजिक आधार पर भेदभाव की गंभीर समस्या मौजूद है। इसे समाप्त करने के उद्देश्य से यूजीसी नियम सामाजिक न्याय की दिशा में एक सकारात्मक,आवश्यक पहल हैं। इसका मूल उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म-स्थान और दिव्यांगता के आधार पर होने वाले किसी भी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करना, सभी हितधारकों के बीच समानता, समावेशन सुनिश्चित करना है। यह व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 21 की मूल भावना के अनुरूप है। संस्थागत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न से जुड़ी सबसे अधिक शिकायतें इन्हीं प्रमुख संस्थानों से सामने आती रही हैं। ये वही संस्थान हैं, जहां से देश का भावी प्रशासनिक, तकनीकी और नीतिगत नेतृत्व तैयार होता है।
ऐसे में यदि यहां समानता, न्याय सुनिश्चित नहीं होगा, तो समाज के वंचित वर्गों के छात्रों के साथ होने वाला अन्याय कभी समाप्त नहीं हो पाएगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि यूजीसी विनियम 2026 को पूरी प्रभावशीलता के साथ लागू किया जाए।
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