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अनाथ के रूप में आश्रम में रह रहे इमामुद्दीन को परिजनों को सौंपा

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मंडावली के मुस्सेपुर आश्रम में 14 वर्ष पूर्व लापता हुआ परिजनों के बीच खड़ा इमामुद्दीन। - फोटो : NAZIBABAD
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अनाथ के रूप में आश्रम में रह रहे इमामुद्दीन को परिजनों को सौंपा
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नजीबाबाद। मुस्सेपुर के वृद्ध आश्रम में उस समय अनाथ के रूप में रह रहे इमामुद्दीन (46) की आंखों से आंसू निकल पड़े जब उन्हें 14 वर्ष बाद परिजनों से आमना-सामना हुआ।
आर्य सुगंध संस्थान के मुस्सेपुर स्थित वृद्ध आश्रम में कई वर्षों से अनाथ के रूप में इमामुद्दीन रह रहे थे। संस्थान की संचालिका कमलेश आर्या ने बताया कि पांच वर्ष पूर्व महर्षि दयानंद वृद्ध आश्रम मुस्सेपुर को गाजियाबाद के अस्पताल ने अनाथ के रूप में इमामुद्दीन को सौंपा था। तीन वर्ष अस्पताल में रहने के बाद घर का पता न चलने के बाद से इमामुद्दीन आश्रम में रह रहा था। मानसिक रूप से परेशान इमामुद्दीन स्वयं को बिहार का रहने वाला बताया करता था।
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आश्रम की संचालिका बताती हैं कि काफी समय से मंडावली पुलिस के माध्यम से बिहार के विभिन्न जनपदों में संपर्क के बाद आखिरकार इमामुद्दीन के परिजनों तक उनके यहां रहने की सूचना पहुंची। इमामुद्दीन की वृद्ध माता रोहताश सासाराम बिहार निवासी शमसुन्निसा और संबंधी आश्रम पहुंचे तो अनाथ के रूप में रह रहे इमामुद्दीन और परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। परिजनों ने बताया कि 14 वर्ष पूर्व इमामुद्दीन अचानक घर से लापता हो गया था। उसकी पत्नी की भी इस दौरान मृत्यु हो चुकी है।
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