नूरपुर क्षेत्र के गांव टंडेरा में जहरील पदार्थ निगलने वाले पुखराज का झोपड़ीनुमा घर। संवाद
बिजनौर। कर्ज में डूबा पुखराज का परिवार आर्थिक तंगी ही नहीं बल्कि तमाम परेशानियों को झेलता रहा।
एक पक्की छत भी मयस्सर नहीं हो सकी। पुखराज की झोंपड़ी तक सरकारी की ओर से चलने वाली आवास योजना भी नहीं पहुंची। तिरपाल की झोंपड़ी में रहने वाले पुखराज के परिवार को हर साल की बरसात डराती थी। खैर, अब परिवार में उसका बेटा ही बचा है। पुखराज, उसकी पत्नी और दो बेटियों ने जहर निगला तो पुलिस और प्रशासनिक अफसर उसके घर जांच के लिए पहुंचे। घर के नाम पर झोपड़ी देख हर कोई उसकी गरीबी देखकर भावुक हो गया। झोंपड़ी में खाली पड़े डिब्बे यह गवाही दे रहे थे कि इस परिवार के पास राशन भी ज्यादा दिनों का नहीं था।
हालांकि सरकारी सस्ते गल्ले का राशन इस परिवार को हर महीने मिलता है। इसके अलावा सबसे ताज्जुब की बात यह रही कि गांव में गरीबों के लिए आवास योजना संचालित होती है, मगर उसे आज तक आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया। प्रधान से बात की गई बताया कि पिछले वाली लिस्ट में उसका नाम नहीं था। अबकी बार मकान बनवाने के लिए आवास योजना में उसका नाम शामिल किया गया था।
बेटी की शादी को लेकर भी चिंता में था परिवार
बिजनौर। पुखराज अपनी बड़ी बेटी पूनम की शादी चार साल पहले कर्ज लेकर कर चुका था। अब दूसरी बेटी अनीता उर्फ नीतू की शादी होनी थी। शादी के लिए परिवार में चर्चाएं चल भी रही थी। मगर परिवार पुराने कर्ज और अब बेटी की शादी के लिए रुपयों के इंतजाम को लेकर भी परेशान था। अनीता की शादी के लिए अभी रिश्ता तो कहीं तय नहीं हुआ था। मगर परिवार को उसकी शादी की चिंता सता रही थी। संवाद
नूरपुर क्षेत्र के गांव टंडेरा में जहरील पदार्थ निगलने वाले पुखराज का झोपड़ीनुमा घर। संवाद