बाल श्रमिक विद्या धन योजना से जगी पढ़ाई की आस
बिजनौर। जिले के प्रवासी कामगारों को मुख्यमंत्री कि बाल श्रमिक विद्या धन योजना में उनके बच्चों को शामिल किए जाने की उम्मीद है। इससे कामगारों में बच्चों की पढ़ाई को लेकर आस जगी है।
जिले में कोरोना प्रकोप के कारण लॉकडाउन में 17000 से अधिक श्रमिक महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान, पंजाब आदि से आए हैं। जिले में डेढ़ हजार से अधिक 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे व छात्र भी आए हैं। कामगारों को मनरेगा में काम दिया जा रहा है। इससे वे परिवार का पालन पोषण कर सकें। यहां आकर कामगार अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंतित हैं। उत्तराखंड राज्य के हरिद्वार से आए हल्दौर ब्लॉक के ग्राम चांदा नंगली निवासी सोनू का कहना है कि सरकार ने मनरेगा में काम देकर दो वक्त की रोटी का इंतजाम कर दिया है। उसका पुत्र विवेक आयु आठ वर्ष तथा पुत्री नूतन आयु छह वर्ष हरिद्वार में पढ़ रहे थे। वह बच्चों की पढाई को लेकर परेशान हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाल श्रमिक विद्या योजना का शुभारंभ किया है। इसमें कामकाजी बच्चों को बाल श्रम से अलग करके शिक्षा से जोड़ना है। योजना में बालक को हर माह 1000 रुपये तथा बालिका को 1200 रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री की घोषणा से कामगारों को उम्मीद बंधी है कि उनके बच्चों को भी इस श्रेणी में शामिल किया जाएगा। उनके बच्चे आगे पढ़ सकेंगे। गांव के बाबूराम आर्य, नांगल जट के नरेंद्र कुमार आदि का कहना है कि घोषणा से बाल श्रमिक शिक्षा की धारा से जुड़कर स्वावलंबी बनेंगे।