बिजनौर में भारतीय गो क्रांति मंच के संस्थापक गोपाल मणि ने कहा कि गो हत्या करने वाले पर मानव हत्या का मुकदमा चलना चाहिए। उन्होंने देशी गाय के विलुप्त होने पर चिंता जताई।
गोपाल मणि ने प्रेसवार्ता में कहा कि गो माता भारतीय संस्कृति की मूल है। गाय औषधि का भंडार है। गाय का गोबर एंटीबायोटिक है। देशी गाय के गोबर में 90 से 95 प्रतिशत मेथेन गैस होती है। मेथेन गैस कुकिंग गैस का महत्वपूर्ण घटक है। गाय के गोबर से सीएनजी तैयार करके बडे़ पैमाने पर ईंधन की बचत होगी। देशी गाय की प्रजाति लुप्त होती जा रही है। गो वंश को बचाने के लिए उन्होंने बीड़ा उठाया है। अभियान 23 फरवरी 2014 को गंगौत्री से शुरू हुआ था। समापन 18 फरवरी 2018 को दिल्ली में होगा। मंच की ओर से भारत के राष्ट्रपति को पांच सूत्रीय मांगों को लकर ज्ञापन दे चुके हैं, जिसमें गो माता को राष्ट्र माता घोषित करने, गो मंत्रालय अलग बनाने, गाय के गोबर से कुकिंग व सीएनजी तैयार करने, दस साल आयु तक के बच्चों को आंगनबाड़ी व स्कूलों के माध्यम से गो दूध देने, गो हत्या को मानव हत्या का दर्जा दिए जाने की मांग की गई है। इससे पहले गो क्रांति मंच यात्रा के बिजनौर पहुंचने पर गो पालकों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में गली मोहल्लों में घूमने वाली गायों को संरक्षण देने,गौ रक्षा का प्रचार प्रसार करने की अपील की गई।