होम आइसोलेशन की सुविधा फिर भी डर रहे लोग
बिजनौर। कोरोना का संक्रमण भयावह रूप लेता जा रहा है। चिकित्सक बीमारी के लक्षण उभरने पर जांच की सलाह दे रहे हैं, लेकिन लोग जांच कराने से परहेज कर रहे हैं। ऐसे में मरीज की स्थिति बिगड़ने पर संभालना मुश्किल हो रहा है। बुखार, खांसी और सर्दी होने पर भी लोग भयभीत हो रहे हैं। कुछ लोग कोरोना का लक्षण मान कर इलाज भी करने लग रहे हैं, लेकिन तमाम लोग जांच से कतरा रहे हैं। जांच के बाद ज्यादातर मामलों में होम आइसोलेशन ही करना पड़ रहा है। इसके बावजूद लोग जांच कराने में डर रहे हैं।
जिले में रोजाना सैकड़ों की संख्या में कोरोना संक्रमित केस मिल रहे हैं। इसके अलावा घर-घर खांसी, नजला और बुखार से पीड़ित मरीज पड़े हैं। इनमें से ज्यादातर लोग चिकित्सकों की सलाह के बाद भी अपनी कोरोना जांच कराने से बच रहे हैं। इससे फेफड़ों का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है और लोगों की मौतें हो रही हैं। पंचायत चुनाव के बाद से गांवों में कोरोना ने विकराल रूप लिया है। बुखार और कोरोना से मौतें होने के बाद हरकत में आए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव-गांव जाकर कैंप किया और लोगों को जांच कराने के लिए कहा। जांच के लिए गांवों में पहुंच रही स्वास्थ्य विभाग की टीम को देखते ही दफा हो रहे हैं।
जांच रिपोर्ट आने में देरी को बता रहे कारण
कोविड-19 के नोडल अधिकारी डा. पीआर नायर ने बताया कि जांच के बाद ज्यादातर मरीजों को उनकी इच्छा के आधार पर होम आइसोलेशन में ही भेजा जा रहा है और वे ठीक भी हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि जांच नहीं कराने वाले मरीज की जान तो जोखिम में रहती ही है और वह बीमारी भी फैलाता रहता है। हालांकि मरीजों का कहना है कि जांच कराना भी आसान नहीं है। रिपोर्ट कई दिनों बाद मिल रही है। इस वजह से भी लोग जांच के बजाय लक्षण के आधार पर इलाज कराने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।