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हैदरपुर वैटलैंड में दिखा बारहसिंघा का झुंड

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बिजनौर-मुजफ्फरनगर की सीमा पर बने हैदरपुर वैटलैंड में घूमता बारहसिंघा का झुंड। - फोटो : BIJNOR
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हैदरपुर वैटलैंड में दिखा 150 बारहसिंघा का झुंड
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बिजनौर। बिजनौर-मुजफ्फरनगर की सीमा पर बने हैदरपुर वैटलैंड में करीब 150 बारहसिंघा का झुंड दिखाई दिया है। बारासिंघा का इतना बड़ा झुंड दिखने से वन विभाग के अफसर भी गदगद हैं। अब बारहसिंघा की गिनती के लिए योजना बनाई जा रही है। ड्रोन कैमरों से बारहसिंघा की गणना कराई जाएगी। इसके लिए देहरादून से विशेषज्ञों की टीम बुलाई जाएगी।
हस्तिनापुर सेंक्चुरी का गठन बारहसिंघे के संरक्षण के लिए किया गया है। एक समय गंगा किनारे बसे घास के मैदानों में बारहसिंघे के बड़े बड़े झुंड दिखाई देते थे। 2013 में उत्तराखंड में आई जल प्रलय ने मैदान में बसे इन बारहसिंघा को बहुत नुकसान पहुंचाया था। बारहसिंघा बाढ़ में बह गए थे। श्री श्री रविशंकर की आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से जुड़े आशीष लोया के प्रयास से बारहसिंघे व पक्षियों को संरक्षण देने के लिए हैदरपुर वैटलैंड को संरक्षित किया गया है। यहां देशी विदेशी पक्षियों की सैकड़ों प्रजातियां हैं। हैदरपुर वैटलैंड में बाहरसिंघा भी कुछ समय से दिख रहे थे। आशीष लोया यहां पर पक्षियों व वन्य जीवों की तलाश में घूमते रहते हैं।
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आशीष लोया को हैदरपुर वैटलैंड में करीब 150 बारहसिंघों का झुंड दिखाई दिया है। इतनी संख्या में लंबे समय बाद गंगा किनारे बारहसिंघों का कोई झुंड दिखाई नहीं दिया है। उन्होंने इसके फोटो वन विभाग के अफसरों को दिखाए तो वे भी देखकर दंग रह गए। वन विभाग अब बारहसिंघा की गिनती के लिए तैयारी कर रह है। हैदरपुर वैटलैंड में ड्रोन कैमरों से बारहसिंघा की गिनती कराई जाएगी। इसके लिए देहरादून से विशेषज्ञों की टीम बुलाई जाएगी। हैदरपुर वैटलैंड में पक्षियों के साथ साथ बारहसिंघा की संख्या भी बढ़ने को प्रकृति के लिहाज से भी सुखद परिणाम कहा जा रहा है। आशीष लोया का कहना है कि हैदरपुर वैटलैंड में इंसानी दखल नहीं है। इसलिए वहां पर पशु, पक्षियों के साथ बारहसिंघा भी अपनी संख्या में इजाफा कर रहे हैं। जल्दी ही हैदरपुर वैटलैंड में और वन्य संपदा बढ़ी दिखाई देगी। इसके लिए शासन, प्रशासन भी पूरी कोशिश कर रहा है।
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जिले के हैदरपुर वैटलैंड में बारहसिंघों का समूह मौजूद है, जो अच्छी बात है। हस्तिनापुर अभ्यारण्य का गठन बारहसिंघा के संरक्षण के लिए किया गया था। गंगा किनारे बारहसिंघों की संख्या बढ़ रही है, जो अच्छा है। हरिद्वार की झिलमिल झील से लेकर मुजफ्फरनगर, मेरठ और बुलंदशहर तक बारहसिंघा का प्राकृतवास है। यहां तक येे विचरण करते रहते है। दो दिन पहले बिजनौर के आशीष लोया ने हैदरपुर वैटलैंड में बारहसिंघा का समूह देखा था, जिसे कैमरे में कैद किया है - सूरज, डीएफओ मुजफ्फरनगर।
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