फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलग से बनेगा हीमोफीलिया वार्ड

विज्ञापन
विज्ञापन
अलग से बनेगा हीमोफीलिया वार्ड
विज्ञापन

बिजनौर। जिला अस्पताल में हीमोफीलिया के मरीजों के लिए अलग से वार्ड बनेगा। अभी तक हीमोफीलिया के मरीज जनरल वार्ड में ही संयुक्त रूप से भर्ती करने पड़ते हैं या फिर उन्हें हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। हीमोफीलिया के मरीजों की गंभीरता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। अफसरों की मानें तो किसी भी एक वार्ड को चयनित कर इसे सेपरेट वार्ड बनाया जाएगा। जिससे हीमोफीलिया के मरीजों को अलग भर्ती किया जा सके।
हीमोफीलिया एक अनुवांशिक बीमारी है। इसमें खून का थक्का बनना बंद हो जाता है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉक्टर राधेश्याम वर्मा के अनुसार जब शरीर का कोई हिस्सा कट जाता है तो खून में थक्के बनाने के लिए जरूरी घटक खून में मौजूद प्लेटलेट्स से मिलकर उसे गाढ़ा कर देते हैं। इससे खून बहना अपने आप ही रुक जाता है। हीमोफीलिया दो प्रकार का होता है। हीमोफीलिया ए में फैक्टर आठ की कमी होती है, जबकि हीमोफीलिया बी में घटक नौ की मात्रा घट जाती है। ये दोनों ही खून में थक्का बनाने के लिए बेहद जरूरी होते हैं। जिला अस्पताल में कोई निश्चित वार्ड नहीं होने के कारण मरीजों को उपचार के लिए परेशान होना पड़ता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
विज्ञापन

हीमोफीलिया के मरीज अक्सर घाव में रक्त रिसाव या जोड़ों में तीव्र दर्द की शिकायत लेकर आते हैं। इन परेशानियों को दूर करने के लिए अलग से वार्ड बनाया जाएगा। जिससे ऐसे मरीजों को अलग वार्ड में भर्ती कर उनका उपचार किया जा सके और अन्य दूसरे मरीज इसके संक्रमण की चपेट में आने से बच जाएं। उन्होंने बताया कि हीमोफीलिया से पीड़ित मरीज को अर्जेंट ब्लड की जरूरत पड़ती है। सामान्य व्यक्ति के शरीर में 16 प्रतिशत हीमोग्लोबिन होता है। लगातार खून बहने से इसकी मात्रा कम होती जाती है। कभी कभी इससे रोगी की मौत भी हो जाती है।
हर माह आते हैं 25 से 30 मरीज
अफसरों के अनुसार हर महीने करीब 25 से 30 हीमोफीलिया से पीड़ित मरीज जिला अस्पताल में आते हैं। यहां पर अलग से वार्ड की व्यवस्था न होने से ऐसे मरीजों को या तो संयुक्त वार्ड में ही भर्ती करना पड़ाता है या फिर उन्हें हायर सेंटर के लिए रेफर करने को मजबूर होना पड़ता है। यहां पर हीमोफीलिया के लिए सेपरेट वार्ड बनने बाद यहां के मरीजों को जिला अस्पताल में ही यह सुविधा मिलेगा।
विज्ञापन

भेजा गया प्रस्ताव
हीमोफीलिया के लिए रिजर्व वार्ड की आवश्यकता होती है। जिससे अन्य मरीजों में इसके रोगाणु न पहुंचे। जिला अस्पताल में हीमोफीलिया के लिए सेपरेट वार्ड बनवाने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है - डाक्टर ज्ञानचंद, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल बिजनौर।
हीमोफीलिया के लक्षण
मल में खून आना, गहरे नीले घाव पड़ना।
बिना कोई चोट लगे ही बड़े-बड़े नील पड़ जाना।
बहुत ज्यादा रक्त स्त्राव होना।
मसूड़ों में खून आना, जोड़ों में दर्द होना।
बच्चों में चिड़चिड़ापन होना।
सिर में बहुत तेज दर्द होना।
बार-बार उल्टी आना, गर्दन में दर्द होना।
धुंधला दिखना, बहुत ज्यादा नींद आना।
चोट से लगातार खून बहना।
त्वचा नीली पड़ना, हीमोग्लोबिन कम होना
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें