17 अक्तूबर 2023 को रफीक मलिक और खुर्शीद अहमद ने की थी शिकायत
जिला विकास अधिकारी रचना गुप्ता की जांच रिपोर्ट पर डीएम ने कार्रवाई की
ग्राम पंचायत सचिव के विरुद्ध एक सप्ताह के अंदर कार्रवाई का निर्देश दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
नींदडू (बिजनौर)। जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने नींदडू खास की प्रधान अदीबा को नियमानुसार विकास कार्य नहीं कराकर का दोषी मानते हुए वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों के प्रयोग और कृत्यों के संचालन से निलंबित कर दिया है। ग्राम पंचायत सचिव के विरुद्ध एक सप्ताह के अंदर कार्रवाई का निर्देश दिया है।
नींदडू खास निवासी रफीक मलिक और खुर्शीद अहमद ने शपथ पत्रों के साथ जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर गांव में हुए विकास कार्यों में धांधली और शासकीय धनराशि के दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। डीएम ने जिला विकास अधिकारी रचना गुप्ता को जांच सौंपी थी। जिला विकास अधिकारी ने 17 अक्तूबर 2023 को शिकायती पत्र में इंगित बिंदुओं की स्थलीय जांच की। इसके बाद 09 नवंबर 2023 को जिलाधिकारी को रिपोर्ट प्रस्तुत की।
इसमें कांट्रेक्टर एंड सप्लायर के भुगतान बिलों में जीएसटी की गणना में अतिरिक्त भुगतान करने की त्रुटि मिली थी। 2021-22 में खंभों पर लगी लाइटों की जांच में अभिलेख के मुताबिक 59 एसी लाइट और 66 एलईडी लाइट गांव में लगी नहीं मिली थीं, जबकि संबंधित फर्मों को भुगतान किया गया। प्राथमिक विद्यालय में छात्रों के बैठने के लिए खरीदे फर्नीचर में भी इसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता पाई गईं थी। जांच टीम ने ग्राम प्रधान अदीबा एवं ग्राम पंचायत सचिव राकेश कुमार से 6,18,824 रुपये की धनराशि वसूल करने की संस्तुति की थी। तीन फरवरी को एडीपीआरओ रिजवान अहमद एवं क्षविनाथ ने नींदडू खास में लाइट, फर्नीचर और जीएसटी संबंधी जांच की।
जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल ने 29 फरवरी 2024 को आरोपों की पुष्टि के दृष्टिगत उप्र पंचायत राज अधिनियम की धाराओं के तहत नींदडू खास की प्रधान अदीबा को वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग और कृत्यों के संचालन से निलंबित कर दिया।
पीडी और अधिशासी अभियंता भी करेंगे जांच
डीएम अंकित कुमार अग्रवाल ने अग्रेतर जांच के लिए परियोजना निदेशक जिला ग्राम्य विकास अभिकरण बिजनौर एवं तकनीकी सहयोग के लिए अधिशासी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग को नियुक्त किया। इसके अलावा जिला विकास अधिकारी को ग्राम पंचायत सचिव राकेश कुमार के विरुद्ध एक सप्ताह के अंदर विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया गया।