बिजनौर। ग्राम पंचायतों में भुगतान में अनियमितता की लंबी सूची है। ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से पड़ताल पर सामने आया कि कहीं हाथ से सादे बाउचर बनाकर पुआल के नाम पर भुगतान कर दिया गया वहीं दो अलग-अलग सड़कों के भुगतान में एक जैसे बिल लग गए। वहीं एमबी और एस्टीमेट बनाने के नाम पर 33 हजार रुपये तक निकाल दिए गए। इनमें बिल भी सादे बाउचर पर बना दिए गए। नजीबाबाद ब्लॉक की समीपुर और जटपुरा बौंडा में ऐसे मामले सामने आए हैं।
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर पंचायतों में किए कार्य और उनके भुगतान और बिल की जानकारी अपलोड करनी थी। पड़ताल में पता चला कि समीपुर ग्राम पंचायत में फरवरी 2026 में गोशाला के लिए पुआल खरीदने का 68 हजार रुपये का भुगतान हुआ। इसके बिल के नाम पर एक कंप्यूटर टाइप बिल में हाथ से डिटेल भरी है। इस पर न विक्रेता का नाम था और न ही किसी की मुहर और बिल तैयार करके अपलोड कर दिया गया। इसके अलावा रेवोलेशन वर्क पीएस लिखा बिल भी इस माह डाला गया। इसमें 77 हजार रुपये का कार्य हुआ, लेकिन बिल में यह जिक्र नहीं कि काम कौन-कौन से हुए। अब रेवोलेशन डालकर खानापूर्ति कर दी गई। इसके अलावा लाइट रिपेयरिंग के भी 80 हजार रुपये से ज्यादा का भुगतान इसी तरह बिल बनाकर किया गया।
गजपुरा बौंडा में दो सड़कों का एक जैसा भुगतान इस ग्राम पंचायत में मार्च 2026 में एक भुगतान 33 हजार रुपये का किया गया। यह बिल बाउचर बना दिया गया और एक इंजीनियर को एमबी और एस्टीमेट का भुगतान दर्शाया गया जबकि अन्य पंचायतों में एमबी के नाम पर सात हजार रुपये तक भुगतान दर्शाया गया है। इसके अलावा मार्च माह में सीसी रोड निर्माण का करीब 92 हजार रुपये का बिल तो डाला गया, लेकिन बिल पर फर्म की मुहर तक नहीं नजर आई। इसके अतिरिक्त कल्लू की दुकान से सरताज के घर तक, दूसरा साबिर के घर तक दो सड़कों के भुगतान हुए। कमाल यह है कि काम अलग-अलग होने के बाद भी भुगतान की धनराशि दोनों में 95, 765 रुपये ही रही। दोनों में कार्य में एक रुपये का अंतर भी नहीं दिखा।
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इन सभी मामलों दिखवाएंगे: डीपीआरओ
डीपीआरओ डॉ.प्रीतम सिंह ने बताया कि इन मामलों को दिखवाया जाएगा। सभी सचिवों को निर्देश हैं कि सही बिल ही अपलोड करें। यदि कहीं गड़बड़ी मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
बिजनौर के ग्राम पंचायत समीपुर इस बाउचर से किया भगुतान। स्रोत ई ग्राम स्वराज