स्वास्थ्य विभाग में एक करोड़ की जीएसटी चोरी
बिजनौर। जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) में करीब एक करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी का मामला सामने आया है। लखनऊ से जांच करने आई दो सदस्यीय टीम ने इससे संबंधित रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि एनएचएम में करीब सात करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन काम करने वाली आठ फर्मों में से किसी ने जीएसटी जमा नहीं किया।
टीम दो दिन पहले बिजनौर पहुंची थी और जांच के बाद टीम ने शनिवार को सीएमओ कार्यालय से एनएचएम पूरा रिकॉर्ड कब्जे में ले लिया है। करीब डेढ़ साल पहले स्वास्थ्य महानिदेशालय ने कांटेक्ट ऑडिट का कार्य दिल्ली की एक फर्म को सौंपा था, जिसकी जांच में साल 2018 और 2019 में जीएसटी जमा न करने की गड़बड़ी सामने आई थी। अब शासन ने दोबारा सीनियर्स ऑडिटर्स को इसकी जांच सौंपी है। टीम में शामिल अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया जीएसटी जमा न करने का मामला है। सही आकलन तो लखनऊ पहुंचकर रिकॉर्ड का मिलान करने पर ही होगा। जीएसटी चोरी की रकम एक करोड़ के आसपास हो सकती है।
स्वास्थ्य विभाग अफसरों की भी मिलीभगत की आशंका
पिछले दो से तीन सालों से फर्म जीएसटी जमा नहीं कर रही थी और स्वास्थ्य अफसर इसके बावजूद इन्हीं फर्म से काम ले रहे थे। ऐसे में जीएसटी चोरी के मामले में कुछ स्थानीय अफसरों की मिलीभगत की आशंका भी है। जांच टीम ने भी इसकी आशंका जताई है।
ये फर्म कर रही स्वास्थ्य विभाग में काम
स्वास्थ्य विभाग में गणपति इंटरप्राइजेज, सरस्वती प्रेस, लक्ष्मी इंटरप्राइजेज, शाहिद इंटरप्राइजेज, मोनू कैटर्स, यदुवंशी कांट्रैक्ट, लक्की इंटरप्राइजेज, पुनीत टूरिस्ट ढाबा फर्म शामिल हैं। जिनके द्वारा स्वास्थ्य विभाग के काम हुए हैं।
लखनऊ जाकर होगी विस्तृत जांच: जांच अधिकारी
जांच अधिकारी सीनियर ऑडिटर्स सुरेंद्र सिंह ने बताया कि एनएचएम में प्रथम दृष्यता एक करोड़ की जीएसटी चोरी का मामला लग रहा है। विभाग से ऑडिट के सभी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। लखनऊ जाकर विस्तृत जांच की जाएगी, जिसके बाद ही जीएसटी चोरी की गड़बड़ी का मामला सामने आएगा।
यह विभागीय जांच, कोई बड़ा मामला नहीं : सीएमओ
सीएमओ डॉ.विजय कुमार गोयल ने कहा कि यह विभागीय जांच है। साल में दो बार होती है। यह कोई बड़ा मामला नहीं है। जांच में क्या मिला, यह नहीं पता है। यदि गड़बड़ी हुई है तो जांच में सामने आ जाएगी।