06ड्ड ग्राम पंचायत मोहम्मद अलीपुर चौहड क्षेत्र के नलों से स्वत: निकलता पानी।
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गिर रहा भूजल स्तर, उफन रहे बोरिंग
अफजलगढ़। लगातार भूमि के जलस्तर में हो रही गिरावट के बावजूद कुछ इलाकों में बोरिंग और नलों से स्वयं ही पानी उफन रहा है। वैज्ञानिक लंबे अर्से से भूजल स्तर में व्यापक गिरावट आने का हवाला देकर जल संकट की भविष्यवाणी करते रहे हैं। जबकि ब्लॉक के कई गांवों में पानी उफनता देख लोग हैरान हैं।
ग्रीष्मकाल में क्षेत्र के लोगों को जल संकट से जूझना पड़ता है। भूजल स्तर में गिरावट से बोरिंग सूख जाते हैं। जिसके चलते किसानों को सिंचाई करने के लिए भारी समस्या का सामना करना पड़ता है। जलस्तर गिरने के कारण हैंडपंपों के हलक सूख जाने से पेयजल संकट गहरा जाता है। बावजूद इसके अफजलगढ़ विकास खंड के गांव मोहम्मद अलीपुर चौहड़, भूतपुरी, भज्जावाला में दर्जनों ऐसे बोरिंग हैं जो हर मौसम में स्वयं उफनते हैं। इन गांवों में किसान बिना पंपिंग सेट, बिजली के ही खेती की सिंचाई करते हैं। भूजल स्तर में गिरावट के बावजूद ग्राम पंचायत मोहम्मद अलीपुर चौहड़ स्थित बिरला फार्म में मौजूद 8-10 बोरिगों सहित अनेक हैंडपंप उफनते रहते हैं। बिरला फार्म में तैनात तेजपाल सिंह के मुताबिक सिंचाई अथवा पेयजल संबंधी आवश्यकता पूरी होने पर इन पर कपलिंग लगाकर बमुश्किल पानी की निकासी बंद करनी पड़ती है।
पानी के दबाव में उफनते हैं बोरिंग : सकलैनी
भूजल स्तर के जानकार एसएस सकलैनी का कहना है कि तराई इलाके से लगा क्षेत्र होने के कारण यहां का भूजल स्तर काफी ऊपर रहता है। जिसके चलते भूमि में पानी का दबाव बहुत अधिक होता है। पानी की निकासी स्वयं ही होने लगती है। इन इलाकों में ग्रीष्म काल के दौरान भी भूजल स्तर में खास गिरावट नहीं होती तथा स्वयं ही पानी की निकासी होती रहती है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता शुभम सक्सेना का कहना है कि भूमिगत पानी का एक सीमित भंडारण होता है। जिसका पानी पंप के बगैर ही कुएं (बोरिंग) अथवा नल के माध्यम से ऊपर की तरफ प्रवाहित होता रहता है, ऐसे कुएं को तकनीकी भाषा में आर्टेसियन कुआं कहते हैं। प्राकृतिक दबाव की अधिक मात्रा होने पर पानी जमीन की सतह तक पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में इसको बहता हुआ आर्टेसियन कुआं कहा जाता है।