बदलती रहीं सरकारें, जस की तस रही खादर की समस्या
बिजनौर। चुनावी मौसम है तो बिजनौर विधानसभा सीट के मुद्दों की बात भी जरूर होगी। सरकारें और विधायकों के चेहरे बदलते रहे, फिर भी यहां के अहम मुद्दों का समाधान नहीं हो सका। जनता इन मुद्दों पर साल दर साल वोट देकर सरकार बनाती आ रही है। बड़े बड़े नेता भी जिले की धरती पर आकर इन मुद्दों को ही उठाते हैं और अपने प्रत्याशियों को जिताते हैं, विधायक बनाते हैं। पांच साल के बाद में फिर वही मुद्दे बनते हैं, चुनाव होता और इसके बाद भी यही कहानी दोहराई जाती है। बिजनौर विधानसभा सीट पर मुद्दे तो हावी रहते हैं, लेकिन मुद्दे नेताओं के विधायक बनने तक ही हावी रहते हैं।
कब चमकेगी महात्मा विदुर की धरा
जिले में जो भी नेता प्रचार करने आता है वह सबसे पहले महात्मा विदुर को ही प्रणाम करता है। विदुर कुटी को पर्यटन केंद्र बनाने के लिए खूब वोट लिए गए। विदुर कुटी को देश के प्रमुख स्थलों में चुना गया और महाभारत सर्किट में भी शामिल किया गया। लेकिन यहां विकास के प्रस्ताव अभी तक कागजों में ही सिमटे हैं। विदुर कुटी को पर्यटन क्षेत्र बनाने के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। विदुर कुटी पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित की जाए तो इससे यहां रोजगार को बहुत बढ़ावा मिलेगा, लेकिन हुआ कुछ नहीं। अब यहां से गंगा की धारा भी दो किलोमीटर दूर जा चुकी है, जिसे विदुर कुटी तक लाने के प्रयास भी नहीं किए जा रहे हैं।
कब हटेगा कटान और बाढ़ का खतरा
उत्तराखंड से गंगा बिजनौर जिले से ही यूपी में प्रवेश करती है। पहाड़ों की बारिश के पूरे पानी का दबाव गंगा के जरिये खादर के खेत ही झेलते हैं। उफनती गंगा खेतों में जमकर कटान करती है। गंगा के कटान का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मंडावर क्षेत्र में गंगा की धारा दस किलोमीटर तक चौड़ी हो गई है। गंगा के कटान को रोकने के लिए साल 2004 में कटान निरोधी कार्य का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था। इसे मंजूरी एक साल पहले मिली है, लेकिन पैसा जारी नहीं हुआ। जबकि उत्तराखंड में तटबंध बने काफी समय हो गया है। देश को भारत नाम देने वाले राजा भरत भी जिले में गंगा किनारे कण्व ऋषि के आश्रम में जन्मे थे। उनके आश्रम की जमीन भी गंगा के कटान में समा गई। इससे उस ओर जाने वाली धारा भी जिले के खेतों की ओर ही दबाव बनाती है। गंगा खादर के कई गांवों व खेतों में पानी भर जाता है। खादर के 28 गांव इस दंश को झेलते हैं। गंगा अब तक हजारों बीघा जमीन को काटकर अपनी धारा में शामिल कर चुकी है।
बिजनौर-मेरठ रेलवे लाइन का सपना अधूरा
जिले को मेरठ से जोड़ने के लिए दो दशक पहले वाया हस्तिनापुर रेल लाइन को मंजूरी दी गई थी। जिले को मेरठ महानगर से जोड़ने के लिए प्रस्तावित इस रेल लाइन का सर्वे भी जोर शोर से हुआ और सर्वे होते ही इस प्रस्ताव पर पूर्ण विराम लग गया। इस रेल लाइन के बनने से आम जनता और विशेषकर व्यापारी वर्ग को बहुत राहत मिलती। नेताओं ने इसे मुद्दा बनाया भी और वोट लेकर इसे भुनाया भी, लेकिन किया कुछ नहीं। हस्तिनापुर रेल लाइन की फाइल पर जमी धूल की परत गहराती ही जा रही है। जनता के लिए आज भी ये बड़ा मुद्दा है।
फाइलों में अटका है ओवर ब्रिज का निर्माण
बिजनौर में नगीना रोड के रेलवे फाटक पर अक्सर जाम की समस्या रहती है। मालगाड़ी आ जाए तो शंटिंग के लिए फाटक को बंद कर दिया जाता है। फाटक बंद होते ही वाहनों की कतारें लग जाती हैं। इस फाटक पर ओवर ब्रिज बनाए जाने को लेकर कवायद हुई। फाइल भी चली, लेकिन अभी तक ओवर ब्रिज धरातल पर नहीं आ सका है। इस मार्ग पर लगने वाला जाम भी हर चुनाव में मुद्दा बनता है, लेकिन आज तक इस समस्या का समाधान नहीं हुआ।
बिजनौर विदुर कुटी।- फोटो : BIJNOR