गोशालाएं खाली, सड़कों पर घूम रहे गोवंश
बिजनौर। जिले की नगर पंचायतों और नगरपालिकाओं में गोशालाएं संचालित होने के बाद भी गोवंश सड़कों पर घूम रहे हैं। रोक के बाद भी लगातार किसान खेतों में जाकर गोवंश को छोड़ रहे हैं। पालिका व ब्लॉक के कर्मचारी गोवंश को पकड़कर गोशालाआें में बंद करते हैं तो तब तक और गोवंश खेतों में डेरा डाल देते हैं। शहरों में भी सड़कों पर गोवंश घूमते दिख जाते हैं।
बिजनौर नगर पालिका की गोशाला में इस समय 81 गोवंश बंधे हैं। जबकि पालिका की गोवंश बांधने की क्षमता 200 है। अब भी शहर में जहां तहां गोवंश घूमते हुए दिख जाते हैं। ये गोवंश शहर के पास बसे किसानों के होते हैं, जो जिन्हें घर से खोलकर सड़कों पर हांक देते हैं। प्रदेश सरकार की ओर से गोवंश के भरण पोषण के लिए प्रतिदिन 30 रुपये प्रति गोवंश दिए जाते हैं। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी दुर्गेश्वर त्रिपाठी का कहना है पशु चारा महंगा है। 30 रुपये में गोवंश का पेट नहीं भरा जा सकता है। नगर पालिका भी चारे के लिए कुछ बजट जारी करती है। उनका कहना है कि गोवंश के गोबर को कभी कभी बेच दिया जाता है। उसका खाद भी बनाया जा रहा है। यह भी किसानों को बेचा जाएगा।
दो साल बाद भी पूरा नहीं हुआ गोशाला का निर्माण
अफजलगढ़। नगर में पशुओं को आश्रय देने के लिए नगर पालिका की ओर से बनवाई जा रही गोशाला का निर्माण दो साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। बजट के अभाव में गोशाला निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। जबकि मुख्यमंत्री की ओर से तीन माह में गोशाला तैयार कराने के आदेश दिए गए थे। गोवंश गर्मी, बरसात में भी यूं ही खुले में घूम रहे हैं। मोहल्ला किला गड्ढा कॉलोनी में करीब नौ बीघा भूमि में गोशाला बन रही है। इसके लिए शासन से दो करोड़ 65 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी, जो अब घटाकर 1 करोड़ 64 लाख रुपये कर दी गई है। एक करोड़ रूपया शासन ने अवमुक्त कर दिया है। इस संबंध में पालिका ईओ कौशल कुमार का कहना है कि एक करोड़ रुपये अवमुक्त हुआ था। दो हॉल की चारदिवारी व पशुओं के लिए चर आदि का निर्माण कराया जा चुका है। शेष पैसा अवमुक्त होते ही गोशाला निर्माण का कार्य पूरा हो जाएगा। नगरपालिका की ओर से बने कांजीहाउस में नौ पशु रखे गए हैं। उनके चारे व पानी की उचित व्यवस्था की गई है।
गोशाला है नहीं, सड़कों पर निराश्रित गोवंश
कालागढ़/धामपुर। गोशाला की व्यवस्था न होने की वजह से गोवंश सड़कों पर भटकने को मजबूर हैं। इस्लामनगर पंचायत की प्रधान राखी काला ने बताया की पंचायत में गोशाला बनाने की मांग की जाती रही है। परंतु पंचायत में एक भी गोशाला नहीं बनी है। प्रयास किया जाता है कि सड़क पर मिलने वाले गोवंश को सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए। ग्राम पंचायत क्षेत्र में रात के अंधेरे में गोवंश को बाहरी लोग बेसहारा छोड़ कर चले जाते हैं। जिसकी वजह से परेशानी बढ़ गई है। धामपुर में गोवंश के लिए गोशालाओं का निर्माण किया गया है। इन गोशालाओं को चलाने को धन का आवंटन किया जा रहा है, लेकिन आवारा गोवंश को घूमते देखा जा सकता है। हरेवली क्षेत्र में आवारा गोवंश किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
30 रुपये प्रतिदिन में नहीं चलता खर्च
चांदपुर। शासन की ओर से सड़कों पर निराश्रित घूमते गोवंश के लिए गोशाला का संचालन किया जा रहा है। चांदपुर में भी करीब दो वर्ष पूर्व राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के पास पशु आश्रय स्थल बनाया था। जिसकी देखरेख नगरपालिका द्वारा की जाती है। इसमें 29 गोवंश हैं। अधिशासी अधिकारी अनुज कुमार कौशिक ने बताया कि पशुओं के खर्च के लिए शासन से 30 रुपए प्रति पशु के हिसाब से मिलता है। लेकिन प्रति पशु पर इससे ज्यादा खर्च आता है। पशुओं का खर्च नगरपालिका, लोगों के सहयोग आदि से पूरा किया जाता है। पशुओं के गोबर की नीलामी की जानी है। उसकी प्रक्रिया चल रही है।
हरिकिशनपुर गोशाला में नहीं कोई व्यवस्था
रेहड़/बेगावाला। गांव हरिकिशनपुर स्थित दस पशुओं की क्षमता वाली गोशाला में न तो चारे की कोई व्यवस्था है न ही कोई चौकीदार है। बस परिसर में एक सरकारी नल जरूर लगा है। ग्राम प्रधान सोमंत सिंह का कहना है कि विकास खंड स्तर से गोशाला में कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई है। अगर कभी कोई किसान यहां गोवंश छोड़ जाता है तो ग्रामीण ही चारे की व्यवस्था करते हैं। वहीं, बेगावाला की अस्थायी गोशाला ब्रह्मपुरी-रावली में संचालित है। इसमें 12 गोवंश है। गोशाला की देखरेख करने वाले पवन कुमार ने बताया कि 30 रुपये में एक पशु का पेट नहीं भरता है। जब अपने पशुओं के लिए चारा लाते हैं तो उसमें से ही उन पशुओं को भी खिलाते हैं।