फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छात्राओं ने ली स्वाभिमान से जीने की शपथ

Fri, 08 Feb 2019 11:52 PM IST
Deepak Sharma अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
विज्ञापन
धामपुर में दुर्गा सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शपथ लेतीं छात्राएं। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
धामपुर में अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के तहत शुक्रवार को दुर्गा पब्लिक सीनियर सेेकेंडरी स्कूल में नारी गरिमा को बनाए रखने और उनमें आत्मविश्वासी मुस्कान लाने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर छात्राओं को महिला सम्मान के बनाए रखने और देश में महिलाओं की गरिमा का परचम फहराने के लिए विद्यालय की प्रधानाचार्य शमीना अहमद ने हाथ उठाकर संकल्प ग्रहण कराया। कहा कि नारी हर युग में न केवल पूज्य रही है बल्कि राष्ट्र के मान, सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा के लिए कभी पीछे नहीं रही है। आज भी महिलाएं अर्श तक सभी क्षेत्रों में देश के नाम को रोशन करने में पीछे नहीं है। इस मौके पर छात्राओं ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से प्रेरित लघु नाटक प्रस्तुत कर सभी को जागरूक किया।
विज्ञापन

विद्यालय के प्रार्थनास्थल में आयोजित कार्यक्रम का दीप जलाकर किया गया। कार्यक्रम में करीब 200 से ज्यादा छात्राओं और कालेज के महिला स्टाफ ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम की महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए विद्यालय की प्रधानाचार्य शमीना अहमद ने कहा कि नारी के ऊपर घर परिवार से लेकर राष्ट्र के मान, सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा तक की जिम्मेदारी रहती है। जिसे महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में बखूबी के साथ पुरुषों से कई कदम आगे बढ़ निर्वहन करने का पूरा प्रयास ही नहीं कर रही है बल्कि सही मायनों में पूरी तरह से सफल है। इस मौके पर छात्रा तबस्सुम, जैबा, भव्या गहलोत, सानिया ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ पर लघु नाटिका प्रस्तुत की।
मानपुर शिवपुरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. प्रीति विश्नोई ने कहा कि नारी  किसी भी युग कमजोर नहीं रही है। सदैव उनका स्थान सर्वोपरि रहा  है। दंत रोग विशेषज्ञ डा.प्रियंका ग्रोवर ने छात्राओं के जोश भरते हुए कहा कि वह कभी अपने को कमजोर नहीं मानेंगी। आजकल लड़की और लड़के में कोई भेदभाव नहीं है। बालिकाएं मेहनत के बल पर शिक्षा के क्षेत्र में लड़कों से आगे निकल कर राष्ट्र की तरक्की के  लिए विभिन्न क्षेत्र में अपना और अपने घर परिवार के नाम को देश में ही नहीं बल्कि विश्वपटल पर चमकाने का काम करेंगी।
विज्ञापन

डा. प्रियंका ग्रोवर ने छात्राओं को इसके लिए अलग से संकल्प ग्रहण कराया। उन्होंने छात्राओं को आत्म सुरक्षा को जुड़े कराटे सीखने को प्रेरित किया। कार्यक्रम में दीपाली मित्तल, श्रेया, सना आदि  छात्राएं रहीं।  

70 प्रतिशत छात्राओं में खून की कमी
कार्यक्रम में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं के स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। डा.प्रति विश्नोई ने बताया कि जांच में पाया गया कि 70 प्रतिशत से ज्यादा छात्राओं में रक्त की कमी है, जिसके कारण वह कमजोर है। यह सब उनके असंतुलित खानपान के कारण है। वह अगर खानपान की व्यवस्था को ठीक से अपनाना शुरू कर दें तो उनमें रक्त की कमी को दूर किया जा सकता है। दंत रोग चिकित्सक डा. प्रियंका ग्रोवर ने कहा कि छात्राओं को शाम को खाना खाने के बाद ब्रुश करने की जरूरत पर जोर दिया।

‘झांसी नहीं दूंगी, नाम अपना झांसी की रानी कहलाऊंगी’
शिक्षिका पारुल सिसौदिया ने भी कविता के माध्यम से नारी सशक्तिकरण पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा कि कमजोर नहीं है नारी, कमजोर है वो सोच उसकी, कमजोर समझते हैं। ये वो ताकत है जो दिल्ली पर राज बरसाती है। लोगों के मुंह से रजिया सुल्तान नाम कहलाती है। बांधी जब अंग्रेजों ने बेड़ियां, पहनाई थी जब मर्दो को चूड़ियां, तब एक नारी बैठ घोड़े पर आई थी। लडूंगी मर जाऊंगी, पर झांसी नहीं दूंगी, नाम अपना झांसी की रानी कहलाऊंगी।   

महिला सशक्तिकरण के लिए सभी का प्रयास जरूरी
शिक्षिका नूतन देवी का कहना है कि महिला सशक्तिकरण एक जीवन दर्शन है, जिसके लिए संपूर्ण राष्ट्र को प्रयास करना चाहिए। वर्तमान समय में लोग बेटियों को बोझ न समझे और दुनिया में आने से पहले उसे मारे नहीं। केवल महिलाओं में आत्मविश्वास पैदा कर उन्होंने प्रोत्साहित करने की जरूरत नहीं है। वह पुरुषों से कभी पीछे नहीं है।

जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवताओं का होता है वास
शिक्षिका सपना राठौर ने कहा कि आदिकाल से अब तक हर क्षेत्र में नारी ने श्रेष्ठता स्थापित की है। कभी दुर्गा तो कभी चंडी, सरस्वती के साथ ही गार्गी, सुनीता विलियम्स, कल्पना चावला, किरणबेदी, चंदा कोचर के रूप में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। देश के विकास की कल्पना नारी को छोड़ कर की ही नहीं जा सकती। जहां पर नारी की पूजा होती है। वहां पर देवताओं का वास होता है।

संकीर्ण मानसिकता बदलने की है जरूरत
शिक्षिका सोनम ठाकुर का कहना है कि नारी सशक्तिकरण का असली अर्थ तब समझ में आएगा, जब भारत में उन्हें अच्छी शिक्षा दी जाएगी। उन्हें इस काबिल बनाया जाएगा कि वो हर क्षेत्र में स्वतंत्र होकर फैसले कर सकें। संकीर्ण मानसिकता बदलने की जरूरत है।

बेहतर करने की प्रेरणा मिली
कक्षा 11 वीं की छात्रा अफीरा ने अमर उजाला के इस कार्यक्रम की सराहना की। कहा कि संपन्न हुए इस कार्यक्रम से उनके और कुछ बेहतर करने की प्रेरणा मिली है। हम सभी को शिक्षा के क्षेत्र में और मेहनत कर देश के लिए कुछ नया करने का जज्बा पैदा करना है।

अभियान के प्रयास की सराहना
छात्रा मुस्कान का कहना है कि कार्यक्रम उनकी सोच में नया बदलाव आया है। उन्होंने अमर उजाला के प्रयास की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया।

नारी सम्मान को बढ़ाया
छात्रा जिया ने कहा कि अपराजिता अभियान ने नारी सम्मंान को बढ़ाया है। छात्राएं हर क्षेत्र में छात्रों से आगे  बढ़ कर लोहा मनवा रही है।

बेटियों को आगे बढ़ने का मौका मिला
छात्रा नाहिद परवीन कहती है कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने कन्या भ्रूण हत्या को रोक कर बेटियों को जीने और आगे बढ़ने का मौका दिया है।

महिला सशक्तिकरण को और बढ़ाने की है जरूरत
छात्रा  अमिता कहती है कि छात्राएं हर मोर्चे पर परचम फहरा रही है। समाज को अपनी संकीर्ण त्याग कर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए आगे आना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें