सस्ती कीमतों पर आम बेचने को विवश हैं बागवान
भागूवाला/नजीबाबाद। कोरोना संक्रमण के चलते आम के बाग ठेके पर लेने वाले बागवानों को आर्थिक संकटों के दौर से गुजरना पड़ रहा है। उत्तराखंड तथा अन्य प्रदेशों की मंडी तक बागवान आम की फसल नहीं पहुंचा पा रहे जिससे उन्हें सस्ती कीमतों पर आम बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है।
नजीबाबाद तथा जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आम के बाग हैं। आम की फसल पर इस वर्ष कोरोना के साथ आंधी-तूफान और बीमारी का असर पड़ रहा है। आम के बाग आमतौर पर फसल आते ही ठेेके पर ले लिए जाते हैं। ठेके पर आम के बाग लेने वाले बागवान महामारी के चलते दूसरे प्रदेशों में नहीं ले जा पा रहे। बागवान नौशाद, रईस, घसीटा, राकेश, जुल्फकार का कहना है कि भागूवाल तथा आसपास के क्षेत्रों के आम देहरादून और ऋषिकेश मंडी में भेजा जाता है। उत्तराखंड में प्रवेश संबंधी प्रतिबंध कड़े होने, उत्तराखंड की आम मंडियों में कोराबार प्रभावित होने से उन्हें आम की सफल काफी कम कीमत पर जनपद की मंडियों में बेचने को विवश है। आम की सफल मात्र 20 से 30 रुपये प्रति किलो बिक रही है। जिससे बागवान और ठेकेदार ठेके की लागत निकालने में भी चुनौती का सामना कर रहे हैं।
कोरोना और मौसम की मार से बागवान परेशान
भागूवाला। आम की फसल पर कोरोना के साथ मौसम की मार भी पड़ी है। फसल के शुरुआती दौर से तीन-चार बार आंधी-तूफान ने फसल को नुकसान पहुंचाया है। जिससे आम की फसल में सुंडी रोग लग रहा है। इससे बड़ी मात्र में फल नीचे गलकर डाल से टूटकर गिर रहे हैं।
बौर के समय ही किया जाता है छिड़काव
नजीबाबाद। हॉर्टी कल्चर के विशेषज्ञ डीपी सिंह का कहना है कि आम की फसल में मेंगो हौपर कीट का मल आम की पत्तियों और फल को प्रभावित करता है। बौर आने के समय कीटनाशी छिड़काव किया जाता है। फसल तैयार है इस समय केवल लंगड़ा और चौसा आम की फसल एक ग्राम वेवस्टीन एक लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।