धामपुर/बिजनौर। महात्मा विदुरकुटी के पास से गंगा की धारा लाने का काम तेजी पकड़ने लगा है। इसकी डीपीआर पहले ही शासन को भेजी जा चुकी है। वहीं अब भारत सरकार जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के अध्यक्ष और उपनिदेशक विदुरकुटी पहुंचे। वहां उन्होंने सिंचाई विभाग के अधिकारियों की टीम के साथ विदुरकुटी गंगाजल चैनल निर्माण का कार्य की परियोजना का का निरीक्षण किया।
विदुरकुटी पर लंबे समय से गंगा की धारा लाने की कवायद चल रही है। इसे लेकर प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है। अफजलगढ़ सिंचाई खंड धामपुर के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार ने बताया कि करीब चार दशक पहले गंगा विदुरकुटी के समीप से प्रवाहित होती थी। जो वर्तमान में अब करीब 700 मीटर दूर से बह रही है। गंगा को विदुरकुटी के समीप से प्रवाहित करने के लिए 23 करोड़ की परियोजना को तैयार किया गया है। जिसका भारत सरकार जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के अध्यक्ष गुलशन राज और उपनिदेशक विवेक जौहरी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों की टीम के साथ विदुरकुटी का निरीक्षण किया।
बताया गया कि विभाग की ओर से बिजनौर जनपद में गंगा के बाएं किनारे पर स्थित विदुर कुटी के निकट गंगाजल चैनल निर्माण का कार्य की परियोजना तैयार होनी है। जिसका गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के अध्यक्ष और उपनिदेशक ने टीम के साथ निरीक्षण किया है। अधिकारियों ने परियोजना से संबंधित बिंदुओं का बारीक से गहन अध्ययन किया। इस मौके पर मुख्य अभियंता पूर्वी गंगा मुरादाबाद शरद कुमार सिंह, असीक्षण अभियंता राजीव कुमार मित्तल, एआईडी के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार सिंह आदि रहे।
चार किलोमीटर हो सकती है क्यूनेट की लंबाई
विदुरकुटी घाट तक गंगा की धारा लाने के लिए सर्वे करते हुए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। फिलहाल विदुरकुटी के आस पास तकनीकी पहलुओं पर विचार करते हुए जमीन का लेवल मापा जा रहा है। इसमें इस बात का ध्यान रखा गया है कि बरसात में गंगा में बाढ़ के समय विदुरकुटी के आसपास बाढ़ की स्थिति न बन जाए। क्यूनेट गंगा से निकलकर विदुरकुटी के पास से होते हुए फिर गंगा में मिल जाएगी।
कमल सरोवर और तितली पार्क और रुद्र वन बनेंगे आकर्षण
वन विभाग जैव विविधता पार्क में ऐसी चीजों को शामिल रहा है, जो जिले में पहली बार ही कहीं नजर आएंगी। यहां पर नवगृह वाटिका, नक्षत्र वाटिका, पंच वटी तो होगी ही, साथ में तितली पार्क भी होंगा। इसके अलावा रुद्रवन भी बनेगा, जहां रुद्राक्ष के पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा तित्रला वन, ब्रहम वृक्ष वन, कल्पतरू वन, बांस पार्क, नेचर ट्रेल भी बनाए जाएंगे। वहां एक सरोवर भी बनेगा, जिसमें कमल के फूल रहेंगे। साथ ही सरोवर के जल में बत्तख, पानी में कछुए भी रहेंगे।
महाभारत काल से जुड़ा इतिहास, पहले यहीं करते थे स्नान
विदुरकुटी का इतिहास महाभारत से जुड़ा हुआ है।
महाभारत होने पर महात्मा विदुर ने बिजनौर में गंगा किनारे आकर कुटिया बना ली थी, उस जगह को आज विदुर कुटी के नाम से जाना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी दुर्याेधन का छप्पन भोग को त्यागते हुए महात्मा विदुर की कुटी में आकर बथुए का साग खाया था। आज भी मंदिर परिसर के पास बथुए के पौधे 12 माह देखने को मिलते हैं।
- गंगा से निकलकर गंगा में ही मिल जाएगी क्यूनिट
विदुरकुटी घाट तक गंगा की धारा लाने के लिए सर्वे करते हुए प्रस्ताव तैयार किया गया है। तकनीकी पहलुओं पर विचार करते हुए जमीन का लेवल मापा गया और फिर डीपीआर तैयार हुई। इसमें इस बात का ध्यान रखा गया है कि बरसात में गंगा में बाढ़ के समय विदुरकुटी के आसपास बाढ़ की स्थिति न बन जाए। क्यूनेट गंगा से निकलकर विदुरकुटी के पास से होते हुए फिर गंगा में मिल जाएगी।