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Bijnor News: एनीमिया मुक्त भारत अभियान में प्रदेश में चौथे स्थान पर बिजनौर

Fri, 26 Apr 2024 03:45 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
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बिजनौर। एनीमिया बीमारी एक बड़ी परेशानी बनती जा रही है। सही पोषण नहीं मिलने से बच्चे से लेकर किशोरी और गर्भवती महिलाएं भी एनीमिया की शिकार हो रहीं हैं। इसके सुधार के लिए एनीमिया मुक्त अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में बिजनौर प्रदेश में चौथे स्थान पर है। अभियान में 62.4 प्रतिशत लोगों ने लाभ लिया।
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स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली की ओर से एनीमिया मुक्त भारत अभियान की रैंकिंग जारी की गई। जनवरी से मार्च तक की रैंकिंग जारी हुई। इसके अलावा अभियान के तहत आयरन फोलिक एसिड का लाभ लेने वाले के हिसाब से रैंकिंग जारी हुई। जिसमें बिजनौर का प्रदेश में चौथा स्थान है। छह से 59 माह तक के 8.3 प्रतिशत बच्चों ने ही आयरन फोलिक एसिड लिया। जबकि पांच से नौ साल तक के 77 प्रतिशत बच्चे, 10 से 19 साल के 73.6 प्रतिशत किशोरियों, 95 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली 57.9 प्रतिशत महिलाओं ने आयरन फोलिक एसिड का लाभ लिया है। आंकड़ों से साफ पता चल रहा है कि पांच से नौ साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाएं अभियान के तहत लाभ लेने में आगे रहीं।
- अब हर महीने होगी हीमोग्लोबिन की जांच
गर्भवती महिलाओं, किशोरियों की दो महीने में हीमोग्लोबिन की जांच होती थी। मगर अब स्वास्थ्य विभाग हर महीने हीमोग्लोबिन की जांच करेगा। कस्तूरबा विद्यालय, प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्रों पर टीम जांच करेगी। हर महीने जांच के बाद पता चलेगा कि सेहत में कितना सुधार हुआ है।
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- इस वजह से हो रहे एनीमिया के शिकार
छोटे बच्चों अपनी माता पर निर्भर रहते हैं। बच्चों के खानपान में लापरवाही बरतने की वजह से बच्चे एनीमिया के शिकार हो रहे हैं। बच्चों को सही पोषण नहीं मिल पाता है। खून में लाल रक्त कणिकाएं कम होने से एनीमिया होता है।
- वर्जन : एनीमिया मुक्त भारत अभियान में जनवरी से मार्च तक बिजनौर प्रदेश में चौथे स्थान पर रहा है। एनीमिया से जंग जीतने के लिए स्कूल, कॉलेेज, आंगनबाड़ी केंद्रों पर जांच बढ़ाई जा रही है। साथ ही आयरन की गोली भी वितरित कर रहे हैं। इसके अलावा सही पोषण की जानकारी दी जा रही है। - डॉ. सुशील कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बिजनौर
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