ग्रामीण बोले, किसी को पता नहीं, क्या करना है
तटबंध पर सोमवार की दोपहर ग्रामीण सिंचाई विभाग के अफसरों से पूछते नजर आए कि तटबंध रोकने क्या योजना है, लेकिन किसी के पास कोई ठोस जवाब नहीं था। ग्रामीणों का आरोप था कि समय रहते पर्याप्त इंतजाम नहीं हुए, इसलिए यह हालात बने हैं। शुरुआत में ही टीम को लगाना था।
38 घंटे तक दिन रात तटबंध को बचाने के लिए हुआ काम, नहीं थमा कटान
बिजनौर बैराज से रावली गांव तक तटबंध पर तारकोल की सड़क बनी हुई है। अब करीब एक किलोमीटर की दूरी में तटबंध कटान की जद में है। रविवार की शाम तक यह सड़क आधी कट चुकी थी। सोमवार की दोपहर तक यह तटबंध समेत यह सड़क गंगा में समा गई। कुछ जगहों पर तटबंध का इतना ही हिस्सा बचा है कि केवल एक ही आदमी पैदल निकल सकता है। जिसके चलते उक्त जगहों पर जेसीबी और डंपर भी जाना बंद हो गया। 38 घंटे से इस पर काम चल रहा है, पर हालात नहीं सुधरे।
पानी के रिसते ही बंद कराया भारी ट्रैफिक
सोमवार की दोपहर करीब दो बजे तटबंध पर एक जगह गंगा पानी रिसता हुआ नजर आया तो टूटने की आहट होते ही मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे पर बस और ट्रकों का संचालन बंद कराया गया। पुलिस ने बैरियर लगाकर वाहनों का संचालन रोक दिया। क्योंकि अगर तटबंध टूटता है तो गंगा का पानी सीधे हाईवे पर आएगा।
आसपास के गांव में अनाउंस कराकर किया सतर्क
रविवार की रात ही प्रशासन के नुमाइंदों ने खादर के गांव में पहुंचकर मस्जिदों और मंदिरों के लाउडस्पीकर से अनाउंस कराया। सोमवार को ग्राम प्रधाना और शिक्षकों के माध्यम से लोगों को सख्त चेतावनी दी गई कि पानी भरा तो मुसीबत हो जाएगी।
-तटबंध की तलहटी में बसे गांव में लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर जाना शुरू किया
कोई पेड़ काटने में लगा है तो कोई पेड़ को उठाकर तटबंध के कटान वाली जगह पर डाल रहा है। कोई मिट्टी के कट्टे भरने में तो कोई उन्हें उठाकर गंगा में डालने पर। करीब एक हजार ग्रामीण और मजदूर डटे रहे।