बिजनौर। जिले में गंगा एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया 10 दिन बाद शुरू हो जाएगी। गजट जारी होने के बाद सोमवार से चिह्नित जमीन पर आपत्तियां मांगी गई हैं। आपत्तियों के निस्तारण के साथ ही दर निर्धारण की प्रक्रिया भी इसी दौरान पूरी हो जाएगी। यूपीडा ने मुआवजा वितरण की जिम्मेदारी एसएलओ विभाग को सौंप दी है।
गंगा एक्सप्रेसवे अमरोहा के हसनपुर से शुरू होगा और बिजनौर जिले में चांदपुर तहसील क्षेत्र में प्रवेश करेगा। जिले की तीन तहसीलों चांदपुर, बिजनौर और नजीबाबाद के 109 गांवों से होकर हरिद्वार तक पहुंचेगा। इसकी लंबाई जिले में 56 किमी रहेगी। इन गांवों की करीब 1058.44 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण होना है। जिसके एवज में 8 हजार किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। हाल ही में यूपी कैबिनेट में इसके लिए 10,761 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है।
शनिवार को गंगा एक्सप्रेसवे का गजट का प्रकाशन हो गया। करीब 15 दिन से चल रहा यूपीडा, प्रशासन और निजी कंपनी एसएस इंफ्रा का फाइनल सर्वे भी पूरा होना वाला है। जिसके चलते अब आपत्तियों के साथ ही चिह्नित जमीन के दर निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है। आपत्तियों के निस्तारण के बाद किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए प्रशासन और एसएलओ (विशेष भूमि अध्याप्ति विभाग) विभाग तैयारियों में जुटा है।
एडीएम न्यायिक शदरपाल सिंह ने बताया कि आपत्तियां मांगी गई है। आपत्तियों के निस्तारण के बाद इसी माह जमीन अधिग्रहण शुरू कर दिया जाएगा। दर निर्धारण से लेकर अधिग्रहण तक की प्रक्रिया चल रही है।
पांच जगहों पर बनाए जाएंगे जंक्शन
बिजनौर में पांच जगहों पर एक्सप्रेस-वे पर उतरने और चढ़ने के लिए जंक्शन बनाए जाएंगे। इसमें बिजनौर चांदपुर मार्ग पर गांव उलेढ़ा के पास जंक्शन बनेगा। इसके बाद विदुरकुटी को जोड़ने के लिए भी बड़ा जंक्शन बनाया जाएगा। फिर बिजनौर नूरपुर मार्ग पर गोलबाग के पास जंक्शन बनाया जाना है। बिजनौर नगीना मार्ग पर वीकेआईटी के पास और बिजनौर-मंडावली रोड पर चंदक में रेलवे फाटक से थोड़ा आगे जंक्शन बनाया जाएगा। उधर, मेरठ पौड़़ी नेशनल हाईवे पर कोई जंक्शन नहीं रहेगा। इस हाईवे पर आने जाने वाले वाहन वीकेआईटी कॉलेज के पास ही एक्सप्रेस वे पर प्रवेश कर सकेंगे।
-हरिद्वार-काशीपुर मार्ग पर वाहनों का कम होगा दवाब
बिजनौर से हरिद्वार की दूरी बहुत अधिक नहीं है, लेकिन एनएच-34 पर स्थानीय और लंबी दूरी के वाहनों का दबाव, कस्बों से गुजरने वाला यातायात और धार्मिक आयोजनों के दौरान बढ़ने वाली भीड़ सफर को प्रभावित करती है। गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार से लंबी दूरी के यातायात को अलग मार्ग मिलने पर एनएच-34 पर भी दबाव कम होने की उम्मीद है।
पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
बिजनौर गंगा किनारे बसा जिला है। विदुर कुटी, गंगा बैराज, नजीबाबाद के ऐतिहासिक स्थल और अन्य पर्यटन स्थलों को बेहतर सड़क संपर्क का लाभ मिल सकता है। हरिद्वार आने वाले पर्यटकों को बिजनौर के पर्यटन स्थलों तक लाने के लिए भी बेहतर कनेक्टिविटी आधार बन सकती है।
गंगा एक्सप्रेस वे निकलने से बिजनौर होंगे ये फायदे
-आसपास के जिलों और प्रदेश से कनेक्टिविटी सुधरेगी
-व्यापार और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
-कनेक्टिविटी बेहतर होने से परिवहन लागत में आएगी कमी
-एक्सप्रेसवे के किनारे वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक सेंटर और उद्योग विकसित होने की बढ़ेगी संभावना
-जिले में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
-कनेक्टिविटी बेहतर होने से बिजनौर में बढ़ेगा निवेश