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खादर क्षेत्र में गंगा ने किया कटान

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मंडावर क्षेत्र के ग्राम मीरापुर खादर के सामने गंगा से हो रहे कटान को दिखाते किसान। - फोटो : BIJNOR
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खादर क्षेत्र में गंगा ने किया कटान
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मंडावर। पिछले कई दिनों से हो रही मानसूनी बारिश के चलते गंगा का रौद्र रूप जारी है। लगातार गंगा का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। सोमवार की रात गंगा का जलस्तर बढ़ने से खेतों का कटान तेजी से होने लगा है। इससे किसानों में बेचैनी बढ़ने लगी है।
पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ने लगा है। अधिकांश नदी नाले उफान पर हैं। दिन प्रतिदिन गंगा विकराल रूप दिखा रही है। बालावाली से लेकर रावली तक गंगा किनारे बसे गांवों में कुंदनपुर, सुक्खापुर, मिर्जापुर, मीरापुर खादर, सीमली, कौहरपुर, राजारामपुर, डैबलगढ़, रावली आदि के खेतों में गंगा लगातार कटान कर रही है। इससे किसानों की फसलें जलमग्न होने से नुकसान हो रहा है। मध्य गंगा बैराज के जेई पीयूष कुमार ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ा है। वर्तमान में गंगा का जल स्तर एक लाख आठ हजार क्यूसेक चल रहा है।
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अप्रोच भी नहीं रोक सकी कटान
ग्रामीणों के अनुसार करीब एक सप्ताह पूर्व गांव सीमली व फतेहपुर सभाचंद में गंगा कटान रोकने के लिए प्रशासन की ओर से लकड़ी की बल्ल्यिां गाड़कर रेत से भरी बोरियां गंगा किनारे लगवाकर अप्रोच बनवाई गई थी, लेकिन गांव फतेहपुर सभांचद के सामने गंगा के विकराल रूप के सामने प्रशासन के सुरक्षा प्रबंध नाकाफी रहे। गंगा की तेज धारा में अप्रोच बह गई।
खादर क्षेत्र में हर साल गंगा कटान से जूझते हैं क्षेत्रवासी
क्षेत्रीय ग्रामीण नेपाल सिंह, भागमल, लित्तर सिंह, महावीर सिंह, धर्मसिंह आदि ने बताया कि क्षेत्रवासी बरसात में हर साल गंगा कटान की समस्या से दो चार होते हैं। क्षेत्रीय लोग कई बार शासन-प्रशासन से स्थायी रूप से तटबंध और गंगा पार खेतीबाड़ी करने के लिए पुल बनवाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों की यह समस्या जस की तस बनी हुई है।
गंगा पार कर खेतीबाड़ी करने जाते हैं किसान
क्षेत्र के किसान जान हथेली पर रखकर गंगा पार कर खेतीबाड़ी करने जाते हैं। पिछले साल हादसा होने के बाद भी प्रशासन खादर क्षेत्र के लोगों को जोखिम भरे जीवन से निजात नहीं दिला पाया है।
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एक साल पूर्व नाव पलटने से डूबे थे 27 लोग
करीब एक साल पूर्व गांव चाहड़वाला के सामने गंगा में उफान आने से नाव पलट गई थी। इस दौरान नाव में सवार 27 लोग डूब गए थे। इनमें से 17 को सकुशल बचा लिया गया था और गोताखोरों ने छह महिलाओं के शव गंगा से निकाले थे, जबकि चार महिलाओं का आज तक कोई पता नहीं चल पाया।
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