बिजनौर। शेयर मार्केट में निवेश और मोटा मुनाफा देने का झांसा देकर एक चिकित्सक से की गई करीब दो करोड़ की ठगी के मामले में साइबर थाना पुलिस ने चार साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह में शामिल चार अन्य अपराधी अभी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। गिरफ्तार और प्रकाश में आए सभी आठ साइबर अपराधियों में से सात उत्तराखंड के जिला उधम सिंह नगर के जसपुर तथा एक नैनीताल के हल्द्वानी का रहने वाला है।
थाना साइबर क्राइम की ओर से जारी प्रेसनोट के अनुसार बीती दस सितंबर को साइबर थाने में एक महिला द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी कि उसके पति को किसी ने एक व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा। ग्रुप की एक सदस्य ने अपना नाम प्रिया देसाई बताया और कहा कि वह प्रोफेसर आनंद बेतिया की सहायक है, जो कि शेयर मार्केट के एडवाइजर हैं। व्हाट्सएप ग्रुप में बीओबी कैप्स एप के माध्यम से शेयर खरीदने और बेचने को कहा गया।
11 जुलाई से छह सितंबर तक इस एप माध्यम से वादिनी के पति ने लगभग 30 ट्रांजेक्शन करते हुए विभिन्न खातों के माध्यम से एक करोड़ 99 लाख तीन हजार रुपये निवेश किए। एप पर लगभग चार करोड़ रुपये का मुनाफा दिखाया जाता रहा। लेकिन जब पीड़ित ने रकम निकालनी चाही तो नहीं निकली। इस पर उसे ठगी होने का पता लगा। इसके बाद मामले में एसपी से शिकायत की गई। शिकायती पत्र में वादिनी ने खुद का नाम गोपनीय रखने की गुहार भी लगाई। बताया जाता है कि मामले में पीड़ित एक चिकित्सक है। पुलिस पड़ताल करते हुए साइबर अपराधियों तक पहुंच गई। साइबर पुलिस ने इस मामले में गुलाम फरीद, मोहम्मद दाऊद, मोनिस अनवर और मोहम्मद अनस निवासीगण जसपुर जनपद उधम सिंह नगर उत्तराखंड को गिरफ्तार किया है। थाना साइबर पुलिस के अनुसार इस मामले में वली, अमन और अदनान निवासी जसपुर उत्तराखंड तथा प्रियांशु ठाकुर निवासी हल्द्वानी जिला नैनीताल के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार अमन और अदनान किसी अन्य मामले में मुरादाबाद जेल में हैं। अन्य दोनों की तलाश की जा रही है।
शुरुआत में छोटा निवेश कराकर दिखाए बड़े लाभ के सपने
साइबर थाना पुलिस के अनुसार पीड़ित व्हाट्सएप ग्रुप पर शेयर मार्केट एडवाइजर पीड़ित को नियमित शेयर खरीदने की सलाह देती। उसे बीओबी कैप्स क्यूआईबी एप डाउनलोड इंस्टाल कराया। इसके बाद पीड़ित को एक खाता नंबर दिया गया जिसमें शुरुआत में एक हजार रुपये से लेकर 20 हजार रुपये तक निवेश कराए गए। विश्वास जमाने के लिए इस पर हुए लाभ को पीड़ित के खाते में भेज दिया गया। इसके बाद पीड़ित ने मोटी रकम निवेश करनी शुरू कर दी। इस दौरान एप पर प्रोफिट भी दिखाया जाता रहा। छह सितंबर को एप बंद हो गया। इस पीड़ित ने ग्रुप में दिए गए नंबरों पर कॉल किया तो वे भी बंद मिले। ग्रुप में वेबसाइट बंद होने पर आपत्ति जताने पर दूसरा लिंक उपलब्ध कराया गया जिससे पीड़ित को ठगी होने का पता लगा।