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सीएए के विरोध में हुए उपद्रव में जावेद आफताब की जमानत याचिका निरस्त

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पूर्व चेयरमैन जावेद आफताब की जमानत याचिका निरस्त
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बिजनौर। सीजेएम दिलीप कुमार सचान ने सीएए के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान शिप्रा होटल में हुई तोड़फोड़ के मामले में आरोपी बनाए गए पूर्व चेयरमैन जावेद आफताब की जमानत याचिका निरस्त कर दी है। इस मामले में जावेद आफताब जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की गई। इस पर सुनवाई की 31 जुलाई की तिथि निर्धारित करते हुए जिला जज जयश्री आहुजा ने प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में स्थानांतरित कर दिया है।
शिप्रा होटल के मालिक गौरव कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 20 दिसंबर को अपराह्न करीब तीन बजे नगर पालिका के तिराहे की ओर से 200-250 उपद्रवी हाथों में लाठी, डंडे, लोहे की तलवारनुमा पत्ती, पत्थर व तमंचे लेकर सड़क पर दोनों ओर खड़े वाहनों, मकानों व दुकानों में तोड़फोड़ करते हुए व आने जाने वाले लोगों से मारपीट करते हुए आ रहे थे। आरोपी होटल शिप्रा में भी आए और होटल के शीशे व होटल में खड़े वाहनों, होटल के अंदर रखे सामान में तोड़फोड़ की। होटल कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की। इस मामले में पुलिस ने 33 लोगों को नामजद किया था। पुलिस विवेचना में इस मामले में पूर्व चेयरमैन जावेद आफताब की सक्रिय भूूमिका सामने आई थी। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए जावेद आफताब की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
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कोर्ट से हिरासत में लेने का प्रार्थना पत्र दिया
बिजनौर। सीएए के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान हुई आगजनी, तोड़फोड़ व मारपीट के मामले में पुलिस द्वारा दर्ज किए गए सात मामलों में जावेद आफताब की सक्रिय भूमिका पाई गई थी। इनमें से शिप्रा होटल के मामले में बृहस्पतिवार को जमानत याचिका निरस्त कर दी गई है। एक मामले में जावेद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत पर हैं। बाकी मामलों में जावेद आफताब की ओर से कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया गया कि उन्हें इन पांचों मामलों में न्यायिक हिरासत में ले लिया जाए। इस पर सीजेएम दिलीप सचान ने उन्हें अन्य पांच मामलों में भी हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।
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बताया जान का खतरा, एनकाउंटर की जताई आशंका
बिजनौर। पुलिस की गाड़ी में बैठे जावेद आफताब का एक वीडियो वायरल हो रहा है। उसमें वे किसी से कह रहे हैं कि उन्हें जान का खतरा है। उनके साथ सरासर ज्यादती हो रही है। लगातार उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाया जा रहा है। हाईकोर्ट ने बहुत अच्छे ग्राउंड मानते हुए उन्हें जमानत दी थी। जमानत होने के बाद प्रशासन बौखला गया और लगातार उन्हें झूठे मुकदमों में फंसा रहा है। उन्हें अपनी जान का बहुत खतरा है। कहा कल जब उनका रिलीज ऑर्डर चला गया तो अस्थायी जेल के सामने करीब 100-150 पुलिसकर्मी, 25-30 गाड़ी, सीओ रैंक के तीन अधिकारी वहां मौजूद थे। उनका ये प्लान था कि वे उन्हें उठाकर गाड़ी में डाल लें और उनका एनकाउंटर कर दें। उन्हें अपनी जान का खतरा है। ये भी डर है कि कहीं वे झूठेे मुकदमात में या एनएसए जैसी चीज में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न कर दें।
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