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कोटावाली और कठियारी नदी के बीच बसा है गांव प्रीतमगढ़, आवाजाही के लिए नहीं है रास्ता

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भागूवाला की कठियारी नदी को साइकिल कंधे पर उठाकर पार करता ग्रामीण। - फोटो : NAZIBABAD
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आवाजाही के लिए जान जोखिम में डालने को मजबूर
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नजीबाबाद। बारिश में कोटावाली और कठियारी नदी का जलस्तर बढ़ने से गांव प्रीतमगढ़ के लोगों को जान जोखिम में डालकर दोनों नदियों को पार कर आवाजाही करनी पड़ी। ग्रामीण वर्षों से कठियारी नदी पर पुल का निर्माण कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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आजादी के 75 साल बाद भी प्रीतमगढ़ के ग्रामीण जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने मजबूर हैं। भागूवाला क्षेत्र का गांव प्रीतमगढ़ रिजर्व फॉरेस्ट में कोटावाली और कठियारी नदी के बीच बसा हुआ है। गांव की करीब 1500 की आबादी को बरसात में कोटावाली और कठियारी नदी के उफान से होकर गुजरती है। बारिश में तो हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं। नदी के उफान के चलते ग्रामीण अपने घरों में कैद होकर रह जाते हैं। ग्रामीण रवींद्र सिंह, धर्मवीर सिंह, पूरन सिंह, भोपाल सिंह, राजो देवी का कहना है कि ग्रामीणों द्वारा आवाजाही के लिए प्रत्येक वर्ष रास्ता बनाया जाता है, लेकिन बरसात में नदी के तेज बहाव में बह जाता है। गांव के दोनों ओर के रास्ते रिजर्व फॉरेस्ट में होने के कारण नदी पार करने के न तो कोई पक्का रपटा है और न ही पुल का निर्माण कराया गया। प्रीतमगढ़ में पहुंचने के लिए अलग से कोई रास्ता नहीं है। बृहस्पतिवार को बारिश होने के कारण कोटावाली और कठियारी नदी का जलस्तर बढ़ गया, जिससे ग्रामीणों को दोनों नदियों से होकर गुजरना पड़ा। ग्रामीणों ने प्रशासन से कठियारी नदी पर पुल का निर्माण कराने की मांग की है।

भागूवाला की कठियारी नदी को पार करते ग्रामीण।- फोटो : NAZIBABAD

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