नदियों में आया उफान, गांवों में बाढ़ के हालात
नजीबाबाद/मंडावर/बेगावाला (बिजनौर)। पहाड़ों पर बारिश से जिले की कई नदियों में उफान आ गया है। 326 गांव बाढ़ प्रभावित हैं। नजीबाबाद से गंगा बैराज तक के गांवों में बाढ़ के हालात हैं। कई गांवों में पानी भर गया है। कई गांवों में नदियां कटान भी कर रही हैं। हजारों बीघा फसल जलमग्न हैं। रावली क्षेत्र में एक दर्जन गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। नजीबाबाद क्षेत्र में कांवड़ियों को रस्सी के सहारे निकाला जा रहा है। कांवड़ियों की सुरक्षा में पुलिस बल तैनात किया गया है।
उत्तराखंड के पहाड़ों पर होने वाली बारिश का पानी जिले के खादर क्षेत्र में आता है। नजीबाबाद में मालन, लकड़हान, रतनाल आदि बरसाती नदियों का पानी आता है। पहाड़ों पर हो रही बारिश से इन नदियों का पानी पाईबाग, कछियाना बस्ती, शेखुपुरा आलम, लाहककला, लाहक खुर्द आदि गांवों में भर गया है। गांवों में पानी भरने से बाढ़ के से हालात हैं। मोटा महादेव भागूवाला मार्ग पर रपटे पर मालन नदी का पानी डेढ़ फीट ऊपर तक बह रहा है। इस रपटे से हर रोज हजारों कांवड़िये गुजर रहे हैं। कांवड़ियों की सुरक्षा को लेकर रपटे पर जेसीबी खड़ी करके रस्सी इससे बांधकर कांवड़ियों को निकाला जा रहा है। इस रपटे के पास कांवड़ियों की सुरक्षा के लिहाज से भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
मंडावर में गजरौलाशिव, लायकपुरी, बाखरपुर, रावली, ब्रह्मपुरी आदि के किसानों के हजारों बीघा जंगल में गंगा व मालन का पानी भर गया है। फसलें कई कई फीट तक पानी मेें डूब गई हैं। गंगा की धारा कई गांवों की ओर कटान करते हुए आबादी की ओर बढ़ रही है। उफन रहीं नदियों के सामने अभी तटबंध बनाने की कोशिश भी नहीं हो सकती है। मालन नदी का पानी बिजनौर-हरिद्वार मार्ग पर बने पुराने रपटे पर बृहस्पतिवार रात तीन फीट तक उतर गया। इस रपटे पर प्रशासन ने बल्ली आदि गाड़कर यातायात बंद करा दिया है। नदी पर नया पुल कुछ माह पहले बन गया था, लेकिन उसे शुरू नहीं किया गया था। रपटे पर पानी आने के बाद रपटे को बंद कर दिया गया। आनन-फानन में शुक्रवार को पुल से पहली बार यातायात गुजारा गया। गांव रावली में भी मालन का पानी रातोंरात भर गया। रात में गांव में पानी भरने से हड़कंप मच गया। गांव वालों ने रात जागकर गुजारी। सुबह को भी गांव में पानी भरा रहा। बाढ़ के हालात से गांव वाले दहशतजदा हैं। गांव रावली व ब्रह्मपुरी के बीच बने रपटे पर भी तीन से चार फीट तक पानी बह रहा है। रपटे से होकर गांव शहजादपुर, गीदड़पुरा, डैबलगढ़, रावली, ब्रह्मपुरी, भोगपुर, मानशाहपुर, इनामपुरा, मोहम्मदपुर आदि के गांव वाले जिला मुख्यालय को आते हैं। रपटे पर पानी आने से इन गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। गांव वाले अब रपटा पार करने के लिए बस एक नाव के सहारे हैं। नाव से एक बार में तीन लोगों को ही रपटा पार कराया जा रहा है।
236 गांव बाढ़ प्रभावित
जिले में 326 गांव बाढ़ प्रभावित हैं। अधिकतर गांव गंगा व मालन नदी के किनारे बसे हुए हैं। धामपुर में भी बरसाती नदियों के किनारे बसे गांवों में बाढ़ के हालात बन जाते हैं। प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए हर गांव में सुरक्षा समिति बनाई है। तहसील पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।
33 बाढ़ प्रणालय बनाए गए
गांवों में बाढ़ के हालात को देखते हुए अलर्ट जारी कर दिया गया है। 33 बाढ़ प्रणालय बनाए गए हैं। गांव वालों के लिए राहत सामग्री व पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करने में भी प्रशासन जुट गया है।
कई जान लील चुका है नदियों का उफान
गंगा में उफान के बाद भी खादर क्षेत्र के किसान जान हथेली पर लेकर गंगा पार करके खेतों में जाने को मजबूर हैं। पिछले साल अगस्त में उफनती गंगा में नाव से पशुओं का चारा लेते समय नाव पलटने से दस महिलाओं की मौत हो गई थी। इनमें से चार महिलाओं के शव अब भी नहीं मिले हैं।
हर गांव में बनाई गई सुरक्षा समिति
एडीएम वित्त एवं राजस्व अवधेश मिश्र के अनुसार जिले में नदियों के उफान पर प्रशासन की पूरी नजर है। हर गांव में सुरक्षा समिति बना दी गई है। कहीं भी कोई हादसा होने पर मदद के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। गांव वाले भी अपने स्तर से सतर्कता बरतें और नदियों के उफान के दौरान नाव से नदी पार न करें।