अनुमोदन के इंतजार में अटका बाढ़ सुरक्षा कार्यों का पैसा
बिजनौर। गंगा के मुहाने पर बसे दर्जनभर से अधिक गांव में हर साल बाढ़ का खतरा बना रहता है। अब बरसात फिर से नजदीक है लेकिन बाढ़ निरोधी कार्य नहीं हो पाए हैं। दरअसल बाढ़ सुरक्षा कार्यों की परियोजनों का अनुमोदन शासन स्तर पर अटका हुआ है। जहां सिंचाई विभाग अभी तक पैसा न मिलने का दावा कर रहा है, वहीं नाबार्ड के अधिकारी 31 मार्च को ही स्वीकृति देने की बात कह रहे हैं।
जिले में गंगा नदी के बाएं किनारे पर बसे गौसपुर, सुक्खापुर, कुंदनपुर, मिर्जापुर, सीमली, राजारामपुर, रघुनाथपुर आदि गांव को बाढ़ से बचाने के लिए कटाव निरोधक और बाढ़ सुरक्षा कार्यो की परियोजना तैयार की की गई थी। करीब 61 करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ निरोधी कार्य कराए जाने प्रस्तावित है। सालों पहले यह परियोजना बनी जोकि अभी तक धरातल पर नहीं आ पाई है। बता दें कि गंगा नदी पहाड़ से निकलकर मैदानी इलाके में बिजनौर से ही प्रवेश करती है। जिस वजह से गंगा की धार एक जगह स्थिर नहीं रह पाती। गौसपुर गांव के सामने गंगा की गहराई में बह रही, जिसके चलते जमीनों का कटान होता है। इस गांव के सरकारी स्कूल तक गंगा पहुंच गई है। वहीं अन्य गांव में भी गंगा के कटान का खतरा बना रहता है।
2016 से चल रही फाइल
अफजलगढ़ सिंचाई खंड की ओर से सर्वे करते हुए परियोजना बनाकर साल 2016 में प्रस्ताव को आगे बढ़ाया। केंद्र जल आयोग की तकनीकी सलाहकार समिति अपनी 145 वीं बैठक में 26 मई 2020 को अनुमोदन दे चुकी है। वहीं वहीं उत्तर प्रदेश राज्य बाढ़ नियंत्रण परिषद की स्थायी संचालन समिति की 54वीं बैठक में 30 नवंबर 2021 को परियोजना पर स्वीकृति की मुहर लगी, जिसके बाद नाबार्ड को भेजा गया।
वर्जन...
नाबार्ड की ओर से परियोजना 31 मार्च को स्वीकृत की जा चुकी है। जिसकी प्रशासन और वित्तीय अनुमोदन शासन स्तर से स्वीकृत किया जाना बाकी है। परियोजना में बोल्डर स्टडस और परक्यूपाइन स्टड बनाए जाएंगे।
- राकेश, अधिशासी अभियंता एवं नोडल बाढ़ नियंत्रण
नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ से 31 मार्च को उत्तर प्रदेश के वित्त विभाग के विशेष सचिव को परियोजना की स्वीकृति का पत्र गया हुआ है। जिसका अनुमोदन नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय को प्राप्त नहीं हुआ।
- विरेश कुमार, जिला विकास प्रबंधक, नाबार्ड