घंटों इंतजार के बाद मायूस लौटे किसान
बिजनौर। सदर तहसील में इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं आने से फरद लेने वाले किसानों को परेशानी उठानी पड़ी। घंटों लाइन में लगने के बाद भी जब फरद नहीं मिली तो किसान अपने घरों को लौट गए। कुछ किसानों ने तहसीलदार से मिलकर समस्या का समाधान कराने की मांग की।
मंगलवार को सदर तहसील में इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं आने से जमीन की फरद निकालने का काम नहीं हो सका। किसान फरद लेने के लिए सुबह से घंटों लाइन लगाकर खड़े रहे। खिड़की के सामने लाइन लगाकर खड़े किसान बार-बार इंटरनेट कनेक्टिविटी आने के बारे में कर्मचारियों से पूछते रहे लेकिन हर बार एक ही जवाब मिलता इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं। कुछ देर बार तहसील कर्मचारी ने खिड़की के बाहर इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं होने का नोटिस चस्पा कर दिया। घंटो के इंतजार के बाद किसान निराश होकर लौटते रहे।
किसानों का आरोप है कि तहसील में आए दिन फरद को लेकर यही झमेला रहता है। कभी इंटरनेट नहीं होता, कभी वेबसाइट नहीं चलती, जबकि साइबर कैफे से फरद तुरंत निकल जाती है, लेकिन तहसील द्वारा प्रमाणित फरद की प्रतिलिपि ही मान्य है, इसलिए किसानों को तहसील के चक्कर काटने पड़ते हैं। कुछ किसान इकट्ठा होकर तहसीलदार धमेंद्र कुमार सिंह ने मिलने पहुंचे। किसानों ने तहसीलदार से रोज-रोज की समस्या से निजात दिलाने की बात कही। उन्होंने मांग की यदि तहसील से फरद नहीं निकल रही है तो किसान साइबर कैफे से निकलवाकर ले आएंगे। इसे तहसील से प्रमाणित करा दिया जाए। ऐसा करने से तहसीलदार ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि वह समस्या को दिखवाएंगे।
बार-बार लौटा दिया जाता
किसान गुड्डू का कहना है कि आए दिन किसानों को इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं होने की बात कहकर लौटा दिया जाता है। सोमवार को भी कनेक्टिविटी नहीं होने के चलते बिना फरद लिए ही वापस लौटना पड़ा था।
खिड़कियों की संख्या बढ़वाई चाहिए
किसान अंकित शर्मा ने कहा कि फरद निकासी के लिए एक ही खिड़की है। पूरी तहसील के किसानों के लिए एक खिड़की पर्याप्त नहीं है। खिड़कियों की संख्या बढ़वाई जानी चाहिए।
समय की होती है बर्बादी
किसान गजेंद्र सिंह ने बताया कि घंटो तक लाइन में खड़ा होने के बाद बोल दिया जाता है कि आज इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है, कल आना। किसान अपना कीमती समय तहसील में बर्बाद कर खाली हाथ लौटकर चला जाता है।
तहसील के खाने पड़ते हैं धक्के
किसान साजिद का कहना है कि आए दिन इंटरनेट नहीं होने का बहाना बना दिया जाता है। जबकि साइबर कैफे पर फरद तुरंत निकल जाती है। लेकिन तहसील की प्रमाणित प्रति के लिए तहसील के धक्के खाने पड़ते हैं।