ग्रीष्मकालीन गन्ने की बुवाई से पहले किसानों को लगा झटका
बिजनौर। किसानों को ग्रीष्मकालीन गन्ने की बुवाई से पहले जोर का झटका धीरे से लगा है। डीएपी तथा एनपी के खाद की कीमतें बढ़ गई हैं। डीएपी की कीमत एक या दो रुपये नहीं बल्कि पूरे 150 रुपये प्रति बोरी बढ़ी है। खाद की कीमत बढ़ने से कृषि लागत बढ़ेगी, जिसकी मार किसान को झेलनी पड़ेगी।
ग्रीष्मकालीन गन्ने की बुवाई शुरू हो गई है। किसान गन्ना बुवाई के समय खेत में डीएपी डालता है। अभी तक डीएपी का कट्टा 1199 रुपये का मिल रहा है, लेकिन अब डीएपी के प्रति कट्टा रेट 150 रुपये बढ़ा दिए गए हैं। किसान को डीएपी का कट्टा 1350 रुपये में खरीदना होगा। किसानों के अनुसार गन्ने की सही पैदावार लेने के लिए डीएपी डालना जरूरी है। कीमत बढ़ने से किसान की लागत बढ़ेगी। किसानों ने डीएपी तथा यूरिया खाद की कीमतों में बढ़ोतरी को कमर तोड़ने वाला फैसला बताया है। भाकियू के प्रांतीय सचिव ठाकुर रामअवतार सिंह, वरिष्ठ किसान नेता चौधरी होशियार सिंह, आदि का आरोप है कि किसान पहले ही डीजल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी से परेशान हैं वहीं खाद की कीमतों में बढ़ोतरी ने किसान की रही सही कमर तोड़ दी है। खाद कीमतों में बढ़ोतरी तुरंत वापस ली जाए।
किसान पर दोहरी मार
खाद के दामों में बढ़ोतरी कर किसान की कमर तोड़ने का काम किया जा रहा है। डीजल के दामों में पहले से ही बढ़ोतरी हो रही है। खाद, डीजल तेल बढ़ने से खेती का खर्च बढ़ गया है। वर्तमान समय में गन्ने की बुवाई हो रही है, जिसमें खाद की जरूरत होती है। किसानों की फसलों के दाम में बढ़ोतरी नहीं हो रही है।
- दिगम्बर सिंह, पूर्व युवा प्रदेशाध्यक्ष भाकियू
डीजल के दाम आसमान छू रहे है। खाद के दाम में बढ़ोतरी से किसान पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। फसल उत्पादन करने पर खर्च बहुत आ रहा है और उसे उसकी फसल का उचित दाम नही मिलता है। गन्ना बुवाई तथा बाद में भी गन्ने की फसल में खाद की ज्यादा आवश्यकता पड़ती है।
- अतुल कुमार, किसान नेता