कतार में गेहूं की बुवाई करके किसान पाएं अधिक उत्पादन
बिजनौर। जिलेभर के किसान खेतों में गेहूं की बुवाई कर रहे हैं। जिले में करीब करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर जमीन में गेहूं बोया जाता है। अभी तक करीब 15 प्रतिशत जमीन में ही गेहूं बोया गया है। जिले के ज्यादातर किसान खेत में हाथ से बिखेरकर गेहूं बोते हैं जबकि कतार से गेहूं की बुवाई करने में उत्पादन अधिक मिलता है। इससे गेहूं की फसल स्वस्थ रहती है।
जिले में 15 नवंबर के बाद से गेहूं की बंपर बुवाई शुरू होती है। किसानों के लिए बाजार में बुवाई के लिए डीबीडब्ल्यू 303, डीबीडब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 222, एचडी 3226 आदि प्रजातियां मौजूद हैं। इनकी औसत पैदावार 35 से 40 क्विंटल प्रति बीघा तक है। इन बीजों में पोषक तत्व भी अधिक होते हैं और बाजार में भी अधिक दाम मिलते हैं। किसान आमतौर पर खेतों में गेहूं की बुवाई करते समय 10 से 12 किलो गेहूं प्रति बीघा डालते हैं, जबकि इतना बीज अधिक हो जाता है। इतना गेहूं बोने से गेहूं के पौधे पासपास उग आते हैं और इनकी जड़ को पर्याप्त धूप और फसल को फूलने के लिए जगह नहीं मिलती है। इससे फसल कमजोर हो जाती है। प्रति बीघा आठ किलो बीज अच्छी पैदावार के लिए पर्याप्त रहता है।
इन बातों का भी रखें ध्यान
- गेहूं की बुवाई लाइन यानी कतारों में करनी चाहिए। इसे बोने में जीरो सीड ड्रिल मशीन, हैप्पी सीडर, सीड ड्रिल मशीनों का प्रयोग करना चाहिए।
- बुवाई में कतार से कतार की दूरी 23 सेंटीमीटर रहनी चाहिए।
- बीज की बुवाई की गहराई पांच सेंटीमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- बुवाई करते समय प्रति एकड़ कम से कम 75 किलोग्राम एनपीके और 30 किलोग्राम यूरिया का प्रयोग करना चाहिए।
- उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण के आधार पर करना उत्तम रहता है।
- बुवाई करने से पहले प्रति किलोग्राम बीज को तीन ग्राम थीरम और दो ग्राम कार्बेडाजिम की दर से शोधित करना चाहिए।
शोधित करके कतार में बोएं बीज
नगीना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. केके सिंह के अनुसार कतार में बोने से गेहूं का उत्पादन अधिक रहता है। किसानों को यह नहीं सोचना चाहिए कि खेत में ज्यादा बीज डालने से पैदावार भी उतनी बढ़ जाती है। किसानों को बीज शोधित भी करके बोना चाहिए।