गायों की सेवा में जुटा पूर्व विधायक का परिवार
सतीश शर्मा
धामपुर (बिजनौर)। गायों को हिंदू ही नहीं, बल्कि मुस्लिम भी गो माता मानकर उनकी सेवा करते हैं। गायों के दूध का परिवार में उपयोग कर रहे हैं। इसका एक उदाहरण शेरकोट में बढ़ापुर विधान सभा क्षेत्र के पूर्व बसपा विधायक मोहम्मद गाजी के यहां देखने को मिलता है। उनका पूरा परिवार ही गायों की सेवा में लगा हुआ है। पूर्व विधायक की भी अपनी गोशाला है, जिसमें दो दर्जन से ज्यादा गाय हैं। इनमें से छह गाय दुधारू है। वह बछिया को पालते हैं और बूढ़ी होने पर भी गाय की सेवा करते हैं। मौत हो जाने पर हिंदू समाज की भांति जमीन में दबाया जाता है। पूर्व विधायक मोहम्मद गाजी हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और गोहत्या करने वालों को सजा देने की वकालत की है।
पूर्व विधायक मोहम्मद गाजी अपनी गोशाला में वह गायों से जन्मे बछड़ों को आसपास के किसानों को खेती करने के लिए फ्री में दे देते हैं। पर बछियों को किसी को नहीं देते। बछियों को वह स्वयं पालते हैं। गोमांस के लिए गायों को मारना वाकई में अपराध है। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। कहा कि गायों की हत्या करने वालों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
बृहस्पतिवार को वार्ता के दौरान पूर्व विधायक ने कहा कि उनकी कृषि फार्म पर गोशाला है। गौशाला में 25 से अधिक गाय पल रही हैं। जो दूध देने वाली गाय हैं। उन्हें वह फार्म से घर ले आते हैं। घर पर ही उनकी सेवा करते हैं। जो दूध प्राप्त होता है उसका परिवार में उपयोग किया जाता है। आने जाने वालों को भी गाय का दूध पिलाया जाता है। उनके पिता हाजी मोहम्मद खुर्शीद करीब पांच दशक से गोशालाओं में गायों को रखकर सेवा करते आ रहे हैं। अब वह और उनके भाई मोहम्मद दानिश, मोहम्मद कमाल अपने पिता के साथ परंपरा को आगे बढ़ाने के प्रयास में लगे हैं। (संवाद)
गोशाला में लगा रखें हैं पंखे, कूलर
पूर्व विधायक का कहना है कि गायों को गरमी से बचाने को गोशालाओं में उनके द्वारा बिजली के पंखे और कूलर लगाए गए हैं। दिन में कम से कम चार बार गायों को नहलाया जाता है। उनका एक भाई मुजाहिद गाजी हैदराबाद में परिवार के साथ रहता है। उसने वहां पर भी गायों को पाल रखा है। उनकी सेवा में लगा रहता है। गोमाता की मांस के लिए हत्या किया जाना गलत है।
मृत गायों को गड्ढा खुदवा कर दफन कराया
पूर्व विधायक बताते हैं कि आज तक उनके द्वारा कोई गाय बेची नहीं गई है। जो गाय बूढ़ी होकर मर जाती है तो वह जेसीबी से गड्ढा खुदवाकर उसे दफना देेते हैं। सड़कों के किनारे खुले में नहीं फेंका। कई गाय तो ऐसी होकर मरी है जो कभी ग्याभिन नहीं हुई। पर उनके द्वारा उन गायों को भी ऐसी ही सेवा की है, जैसी दूध देने वाली गाय की होती है।