बिजनौर में जिले में टीकाकरण में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है। जिले में डिप्थीरिया के लक्षण मिलने वाले 15 मरीजों में से मात्र एक ही बच्ची का टीकाकरण किया गया था। शिशु के जन्म के बाद से टीकाकरण की प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है, इसके अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग द्वारा डिप्थीरिया समेत कई बीमारियों के टीकाकरण करने का प्रावधान है।
शासन की मंशा है कि प्रदेश का हर बच्चा स्वस्थ हो। इसमें बच्चों का टीकाकरण प्रमुख कड़ी है। बच्चों के जन्म लेते ही टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एएनएम, आशा और अन्य स्वास्थ्य विभाग का स्टाफ लगा है। टीम के सदस्य गांव-गांव जाकर नवजात शिशुओं को डिप्थीरिया व अन्य बीमारियों के टीके लगाता है। जिले में डिप्थीरिया के 15 मरीज मिले हैं। नगीना के मोहल्ला मीर का सराय की सोफिया, गांव आलोपुर के सुबहान, आलोपुर गंगा की इकरा परवीन, कोतवाली देहात के गांव कमरूद्दीन का मुंतजीम, बेरखेड़ा की यीशा, जलीलपुर के गांव सदाबाद को मोहम्मद शाहिब, नगीना देहात के गांव शादीपुर का रिहान, नजीबाबाद के गांव जालपुर छोटी का उवैशी व ज्वालीलाल की दीपिका, चांदपुर के मोहल्ला चिम्मन का सुबहान, नहटौर के गांव अलीनगर की अरतजा, कोतवाली के गांव अलीपुर जट का जुनैद व भोगनवाला की नाजिया तथा हल्दौर के गांव मुबारकपुर पोटा की अंशिका में डिप्थीरिया के लक्षण मिले थे। हालांकि इन 15 बच्चों में से स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिर्फ अलीनगर की अरतजा की ही टीकाकरण हुआ था, बाकी के 14 बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ था। उधर, सीएमओ डॉ. सुखबीर सिंह ने कहा कि टीकाकरण में अगर जांच में किसी की लापरवाही पाई गई तो कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।