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पटाखा फैक्टरी में विस्फोट, तीन लोग घायल

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पटाखा फैक्टरी में विस्फोट, तीन लोग घायल
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नहटौर (बिजनौर)। नहटौर-नूरपुर रोड स्थित पटाखा फैक्टरी में विस्फोट हो गया। विस्फोट से फैक्टरी की दीवारें गिर गईं। वहीं टीनशेड से बनी छत उड़ गई। फैक्टरी में मौजूद मजदूरों में भगदड़ मच गई। इसमें तीन लोग घायल हो गए। फायरब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। डीएम उमेश मिश्रा व एसपी डॉ.धर्मवीर सिंह ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया।
नहटौर नूरपुर मार्ग पर मोहल्ला तीरगरान निवासी दो भाई मुबारिक व शाहिद की पटाखा फैक्टरी है। अधिकारियों के अनुसार दोनों के पास 50 किलो बारूद के पटाखे बनाने व भंडारण का लाइसेंस है। मंगलवार सुबह करीब आठ बजे मजदूरों ने फैक्टरी में काम शुरू ही किया था कि अचानक बारूद तैयार करते समय चिंगारी निकलने से आग लग गई। आग को पहले बुझाने का भी प्रयास किया गया। जिसमें कुछ लोग झुलस गए। लेकिन आग बढ़ती चली गई। इस दौरान मजदूरों में भगदड़ मच गई। धीरे धीरे आग पूरी फैक्टरी में फैल गई और तेज आवाज के साथ हुए विस्फोट ने आसपास के क्षेत्र को हिला दिया। जिसमें दीवारें गिर गईं व लिंटर फट गया। फैक्टरी में पड़ी टीन की चादर उड़ गई। विस्फोट के दौरान फैले मलबे की चपेट में आकर तीन लोग घायल हो गए। फायरब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। फैक्टरी संचालक व मजदूर फरार हो गए।
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पुलिस ने सरकारी व निजी अस्पतालों में घायलों को तलाशना शुरू किया। डीएम उमेश मिश्रा व एसपी डॉ.धर्मवीर सिंह ने मौके का मुआयना किया। डीएम उमेश मिश्रा के अस्पताल पहुंचने पर तालिब नाम के एक युवक के भर्ती होने का पता चला। वह भी प्राथमिक उपचार लेने के बाद वहां से चला गया।
50 लोग करते हैं काम
फैक्टरी में आगे के हिस्से में दुकानें हैं, जिनमें रखकर माल बेचा जाता हैं। उसके बाद भंडारण का गोदाम व खाली स्थान में बारूद मिलाने का कार्य होता है। इसके पास ही फैक्टरी के अंदर ब बाहर मजदूर पटाखे बनाने का काम करते हैं। फैक्टरी में महिलाओं सहित करीब 50 लोग काम करते हैं। फैक्टरी में मैजिक कलर शॉट के नाम से पटाखा बनाया जा रहा था।
2014 में हुआ था भीषण हादसा
वर्ष 2014 में जनवरी के माह में नहटौर के ही मोहल्ला तीरगरान में पटाखे बनाते समय अंगीठी से निकली चिंगारी केे बारूद में पहुंचने से भीषण हादसा हो गया था, जिसमें महिला व एक तीन साल के बच्चे सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी। तीन लोग झुलस गए थे, जोखिम भरे इस कारोबार से एक परिवार के कई सदस्य मारे गए थे। पहले घनी आबादी में भी पटाखे बनाए जाते थे, लेकिन हादसे होने पर शहर से बाहर इस कार्य को किया जाने लगा।
आधे दिन में पूरी मजदूरी का देते हैं लालच
इस जोखिम भरे कारोबार में अक्सर महिलाएं व किशोर काम में लगाए जाते हैं। आधे दिन में पूरे दिन की मजदूरी मिलने के लालच में वह अपनी जान दांव पर लगाते हैं। इस कारोबार में पटाखा बनाने वाले मजदूर सुबह से दोपहर तक ही काम करते हैं। ऐसे मजदूरों का फैक्टरी में कोई रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता। वर्ष 2014 में हुए विस्फोट के मामले को दबाने के प्रयास में घायलों को अस्पताल में भर्ती न कराकर घरों में उपचार कराया। जिसमें पांच लोगों की जान चली गई।
अप्रशिक्षित होते हैं मजदूर
लाइसेंस होने के बावजूद इस कारोबार में काम करने वाले अधिकतर मजदूर अप्रशिक्षित होते हैं। ऐसे में उन्हें हादसे के समय क्या करना है क्या नहीं, ऐसी बातों का ध्यान नहीं रहता। उन्हें इस कारोबार के जोखिम का कोई अता पता नहीं होता है। जानकारों की माने तो ऐसे हादसों का बड़ा कारण भी यही होता है।
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दो पर मुकदमा दर्ज
पटाखा फैक्टरी में आग लगने के बाद विस्फोट होने पर पुलिस ने दोनों लाइसेंस धारक भाइयो के खिलाफ लापरवाही बरतने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की है।पुलिस के मुताबिक लाइसेंस धारक मुबारिक व शाहिद के पटाखो के गोदाम में लापरवाही के कारण आग लगने से तालिब व सुहैल और जरीफपुर निवासी महिला मोनी घायल हो गई। लाइसेंस धारक मुबारिक व शाहिद के लापरवाही बरतने के आरोप मे रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। कोतवाल सतेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज होने की पुष्टि की है।

नहटौर मे पटाखा फैक्ट्री मे हुए विस्फोट की घटना के बारे में जानकारी लेते डीएम उमेश मिश्रा।- फोटो : BIJNOR

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