- चांगीपुर चीनी मिल में शुरू हुई ग्रीन वेस्ट डिस्टलरी
- इस चीनी मिल में अभी तक गन्ने से ही बनाई जा रही थी एथेनॉल
- उद्योग विभाग में बिंदल ग्रुप ने किया 100 करोड़ का एमओयू साइन
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। गन्ना बेल्ट में गन्ने के रस से ही बल्कि मक्का, चावल से भी एथेनॉल बन रही है। बिंदल शुगर मिल चांगीपुर में ग्रीन वेस्ट डिस्टलरी की शुरूआत की गई है। पहली बार मिल ग्रीन वेस्ट से एथेनॉल बना रही है।
बिंदल ग्रुप ने उद्योग विभाग के साथ 100 करोड़ निवेश का एमओयू साइन किया था। यह निवेश चांगीपुर चीनी मिल में ग्रीन वेस्ट डिस्टलरी शुरू करने के लिए किया था। पहले यहां गन्ने से ही एथेनॉल बनाई जा रही थी लेकिन ग्रीन वेस्ट डिस्टलरी शुरू होने से मक्का, चावल से भी एथेनॉल बनाई जा रही है। अब यहां 12 महीने एथेनॉल का उत्पादन हो सकेगा। ग्रीन वेस्ट डिस्टलरी नहीं होने से केवल गन्ने के सीजन में ही एथेनॉल उत्पादन हो रहा था। डिस्टलरी जीएम सतेंद्र कुमार गिरी ने बताया कि डिस्टलरी की एथेनॉल उत्पादन क्षमता डेढ़ लाख लीटर प्रतिदिन है। वर्तमान में यहां एक लाख 30 हजार लीटर एथेनॉल का प्रतिदिन उत्पादन किया जा रहा है।
ग्रीन वेस्ट डिस्टलरी में बढ़ी ये व्यवस्था
ग्रीन वेस्ट डिस्टलरी में प्री क्लीनिंग, स्टोरेज साइलो ऑफ ग्रेन, मीलिंग, लिक्विडफिक्शन, डीडीजीएस सेशन जोड़ा गया है। पहले चांगीपुर मिल में संचालित डिस्टलरी में यह व्यवस्था नहीं थी।
डिस्टलरी में 15 हजार मीट्रिक टन स्टोरेज की व्यवस्था
डिस्टलरी जीएम सतेंद्र कुमार गिरी ने बताया कि ग्रीन वेस्ट डिस्टलरी की शुरूआत होने से स्टोरेज सुविधा भी बढ़ी है। यहां 15 हजार मीट्रिक टन स्टोरेज की व्यवस्था की गई है। एक बार में इतनी मात्रा में मक्का, चावल को स्टोरेज कर सकते हैं।
वर्जन :
चांगीपुर चीनी मिल ने ग्रीन वेस्ट डिस्टलरी के लिए 100 करोड़ का एमओयू साइन किया था। डिस्टलरी ने काम करना शुरू कर दिया है। अब गन्ने के अलावा मक्का, चावल से भी एथेनॉल बनाई जा रही है। - अमित कुमार, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र, बिजनौर