मतदाताओं के बिखराव से उलझे समीकरण
रजनीश त्यागी
बिजनौर। जिले की आठों विधानसभा सीटों पर मतदान हो चुका है। जिले के 89 प्रत्याशियों का परिणाम ईवीएम में कैद हो गया है। कौन जीतेगा-कौन हारेगा, दस मार्च को मतगणना के साथ इसका फैसला भी हो जाएगा। मतदाताओं के रुझान की बात करें तो गठबंधन और भाजपा के बीच अधिकांश सीटों पर टक्कर नजर आ रही है।
सुबह सात बजे से ही मतदान शुरू हो चुका था। आमतौर पर पिछले चुनावों में सुबह से ही मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र के बूथों पर लंबी कतारें लग जाती थीं, लेकिन इस बार इसका उल्टा नजर आया। अधिकांश जगहों पर हिंदू बाहुल्य क्षेत्रों के बूथों पर लंबी लाइनें थीं, जबकि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में सुबह नौ बजे के बाद लाइन लगनी शुरू हुईं। एक बात लंबे समय से कही जा रही थी कि मुस्लिम मतदाता गठबंधन के अलावा बसपा पर भी बड़ी संख्या में जाएगा, लेकिन मतदान के दिन ऐसा होता कम ही दिखा। आठों की विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता बड़ी संख्या में सपा-रालोद गठबंधन की ओर जाते दिखे। इसमें से एक छोटा हिस्सा बसपा के पास भी रहा। दोपहर हुई तो जाट वोट भी बिखरते नजर आए।
बिजनौर, चांदपुर और नजीबाबाद विधानसभा सीटों पर जाटों का प्रभाव माना जाता है। अधिकांश वोट भले ही सपा-रालोद गठबंधन पर गए, लेकिन शाम होते-होते एक बड़ा हिस्सा भाजपा को भी मिलता दिखा। नहटौर के साथ-साथ अन्य सीटों पर भी दलितों के एक बडे़ हिस्से का रुझान भाजपा की ओर आता नजर आया। नूरपुर सीट पर सैनी मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा गठबंधन की ओर जाता दिखा। ऐसे में अनुमान से अलग होने वाले मतदाताओं के इस बंटवारे ने कई सीटों के समीकरण उलझा दिए हैं। हालांकि अधिकांश जगहों पर भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के बीच टक्कर होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। (संवाद)