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राममंदिर आंदोलन का हिस्सा रहे लोगों में उत्साह

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राममूर्ति दत्त। - फोटो : BIJNOR
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राममंदिर आंदोलन का हिस्सा रहे लोगों में उत्साह
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अफजलगढ़/रेहड़। पांच अगस्त को अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन के साथ मंदिर निर्माण का सपना साकार होने जा रहा है। आज से 28 साल पूर्व विहिप के आह्वान पर श्री राम मंदिर आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए क्षेत्र से कई लोग अयोध्या गए थे। अब मंदिर के भूमि पूजन की शुभ घड़ी आने पर क्षेत्र के लोगों की खुशी की लहर है।
आज देशवासियों का सैकड़ों साल पुराना सपना साकार होने जा रहा है। गांव भगतावाला निवासी दिग्विजय सिंह (85) ने बताया कि 1992 में तत्कालीन बीजेपी विधायक डॉ. इंद्रदेव सिंह के कहने पर उनके गांव से राममूर्ति दत्त, तुंगल सिंह, नोबत सिंह, गोविंद सिंह, छोटे सिंह तोमर तथा फकीर चंद कश्यप आंदोलन में भाग लेने अयोध्या गए थे। वर्तमान में इन सात में से दिग्विजय सिंह तथा राममूर्ति दत्त ही जीवित हैं। बताया कि उस समय राम मंदिर को लेकर एक लहर थी। कार सेवको में जोश था। हर कार सेवक का कहना था कि मंदिर बनने के बाद ही जाएंगे। अयोध्या प्रवास में उस समय वहां के लोगों ने बहुत सहयोग किया था। कार सेवकों के रहने-सहने की व्यवस्था अयोध्या व आसपास के गांव के लोगों ने ही की थी। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने श्री राम मंदिर मंदिर विवाद सुलझाकर करोड़ों हिंदुओं को एक अनमोल उपहार दिया है। राम मंदिर बनता देख आज वो गौरवान्वित महसूस कर रहे है।
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कादराबाद निवासी बलराम सिंह का कहना है कि छह दिसंबर 1990 को श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए नियमित रूप से चलाई जा रही चरण पालिका यात्रा और राम ज्योति यात्रा के सफल आयोजन में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया था। कार्यक्रम का नेतृत्व करने के कारण जिला एवं पुलिस प्रशासन ने उन्हें और उनके साथी अयोध्या प्रसाद व काफी सिंह के गिरफ्तार करने के आदेश जारी कर दिए थे। इस कारण उन्हें क्षेत्र छोड़कर दूर जंगल में प्रवास करना पड़ा था। बाद में पुन: संघ कार्य के साथ साथ श्री रामविलास पूजन करके अनेकों गांव विजयनगर, चंडिका, जामुनवाला, भिक्कावाला, हिदायतपुर आदि से रामशिला भिजवाई। उन्हें गर्व है कि श्री राम मंदिर निर्माण में उनकी व क्षेत्र के लोगों की सक्रिय सहभागिता रही।

दिग्विजय सिंह।- फोटो : BIJNOR

बलराम सिंह।- फोटो : BIJNOR

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