भाजपा सरकार में जातिवादी व पूंजीवादी सोच के चलते गरीबों, दलितों, पिछड़ों और मुस्लिमों का विकास नहीं हो सका। दलित और आदिवासियों का नौकरी में आरक्षण का कोटा पूरा नहीं भरा जा सका है। आरक्षण को पदोन्नति में भी प्रभावहीन बना दिया है।
मायावती ने कहा कि प्राइवेट सेक्टर में दलितों का शोषण अभी भी बंद नहीं हुआ है। भाजपा, आरएसएस की सरकार के चलते ही धर्म की आड़ में हो रही जुल्म, ज्यादती काफी हद तक बढ़ चुकी है। केंद्र की पूर्व की सरकारों की भांति वर्तमान भाजपा सरकार में गरीबी, महंगाई बढ़ रही है। देश की सीमाएं सुरक्षित नहीं हैं। यह भी चिंता की बात है। विरोधी पार्टियां साम दाम दंड अपना कर केंद्र में सरकार बनाने में लगी हुई है। किसी भी पार्टी से गुमराह नहीं होना है। हमारी पार्टी के लोगों को हवा हवाई चुनावी घोषणा पत्र के बहकावे में नहीं आना है।
कहा कि बसपा कहने में कम और काम करने में ज्यादा विश्वास करती है। उत्तर प्रदेश में चार बार बिना घोषणा पत्र जारी किए ही ऐतिहासिक कार्य करके दिखाए हैं। गरीब परिवारों को जो राशन फ्री दिया जा रहा है उससे भला होने वाला नहीं है। हर हाथ को काम देने का काम हमारी पार्टी करेगी। धर्म की आड़ में विशेष कर मुस्लिम वर्ग के लोगों का जो शोषण किया जा रहा है उसे रोका जाएगा। यूपी में जब मेरे नेतृत्व में सरकार बनी तो रोजी-रोटी के साधन उपलब्ध कराए गए।
पश्चिमी यूपी से जाटों के बच्चे बड़ी तादात में हमारी सरकार में पुलिस में भर्ती हुए। जिनकी करनी व कथनी में अंतर है, उन्हें रोकना होगा। अपने वोटों को एकमात्र बहुजन समाज पार्टी को ही देना है। कहा कि केंद्र में अपनी पार्टी की सरकार बनने पर सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय की नीति के साथ सरकार चलाएगी। अपने देश के महान संतों डॉक्टर भीमराव अंबेडकर, चौधरी चरण सिंह जी के अधूरे सपनों को पूरा करने का काम हमारी पार्टी करेगी।
नाम लिए बगैर चंद्रशेखर पर बोला हमला
बीएसपी को कमजोर करने के लिए विरोधी पार्टियों ने कुछ बिकाऊ लोगों के द्वारा पार्टी बनवाकर दलितों के वोटों को बांटने का जो काम किया और छोटी-छोटी पार्टियां बनाने का काम किया है। उनका काम चुनाव जीतना नहीं खासकर नगीना में दलितों के वोटों को बांटकर दूसरी पार्टियों को चुनाव जिताना है।
बिजनौर में जाट समाज से आपके बीच में चुनाव मैदान में प्रत्याशी उतारा है। मुजफ्फरनगर में पिछली सरकार ने जाट और मुस्लमानों में दंगा कराया, मगर बसपा सरकार में जाट मुसलमानों में कोई मतभेद नहीं हुआ। जाट और मुस्लिम समाज में जो नफरत पैदा की गई, उसे भाईचारे में बदलने के लिए ही बसपा ने जाट समाज से प्रत्याशी उतारा है।