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Bijnor News: नगीना लोकसभा में चुनावी नतीजो ने बना दिए नए समीकरण

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- आजाद समाज पार्टी में भविष्य तलाश रहे समाजवादी और बसपा के दिग्गज नेता
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- आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तैयार की जा रही सियासी जमीन
- चला गया बसपा का जनाधार ,सपा के लिए खड़ी हो गई मुश्किलें
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। चुनावी दंगल में जिसे नौसिखिया समझा गया, उसने दिग्गजों को शिकस्त दे दी। नगीना लोकसभा सीट पर कुछ ऐसा ही हुआ। तीन बार के विधायक रहे भाजपा उम्मीदवार ओम कुमार राजनीति के नए खिलाड़ी आसपा अध्यक्ष चंद्रशेखर के सामने चित हो गए। अब नगीना सीट आसपा के खाते में चली गई। इस सीट पर चंद्रशेखर की जीत ने नए समीकरण तैयार कर दिए हैं।

भाजपा के कोर वोटर में बिखराव और दलित, मुसलमानों का गठजोड़ आने वाले विधानसभा चुनाव पर भी असर डालेगा। क्योंकि सपा और बसपा के नेता भी अब आजाद समाज पार्टी में अपना भविष्य तलाश रहे हैं। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी का जनाधार पूरी तरह से खत्म हो गया है।
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लोकसभा चुनाव के आंकड़े इस बात को तस्दीक करने के लिए काफी हैं। क्योंकि बसपा के उम्मीदवार सुरेंद्र पाल को महज 13,272 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। बसपा उम्मीदवार के लिए इससे बड़ा झटका कुछ और नहीं हो सकता कि पूरा दलित समुदाय ही खिसककर आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार की गोद में जा बैठा।

राजनीति के जानकारों का मानना है कि बसपा का यह वोट बैंक अब अपनी मूल पार्टी की तरफ लौटना संभव नहीं है। इसने अपने नए दलित नेता को चुनकर संसद में भेजा है। हालांकि चंद्रशेखर की जीत में दलित, मुस्लिम गठजोड़ के साथ-साथ भाजपा के कोर वोटर में बिखराव और उम्मीदवार से नाराजगी भी एक बड़ी वजह रही।

समाजवादी पार्टी की भी खिसक रही जमीन
नगीना लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो इस क्षेत्र में पड़ने वाले विधानसभा नजीबाबाद से सपा के विधायक तस्लीम अहमद तीसरी बार विधायक हैं। वहीं नगीना विधानसभा क्षेत्र में भी मनोज पारस हैट्रिक लगा चुके हैं। नूरपुर में भी समाजवादी पार्टी के ही विधायक राम अवतार सैनी हैं। हालांकि धामपुर और नहटौर भाजपा के कब्जे में है। नगीना संसदीय क्षेत्र में सपा के तीन विधायक होने के बाद भी सपा उम्मीदवार मनोज कुमार को महज 1,02,374 वोट ही मिल सके। जो कि यह पुख्ता करने के लिए काफी है कि सपा को भी काफी नुकसान हुआ है।

बसपा के टिकट पर लड़ा चुनाव, अब निभाया आसपा का साथ
समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के तमाम दिग्गज नेता चंद्रशेखर की पार्टी में अपनी जमीन तलाश रहे हैं। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट पाने की खातिर कुछ दिग्गज नेताओं ने चंद्रशेखर का साथ दिया। वहीं, नजीबाबाद से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके नगीना के एक नेता ने भी अब चंद्रशेखर से दोस्ती कर ली और पूरा साथ दिया। एक पूर्व विधायक और एक निकाय के मौजूदा अध्यक्ष भी आजाद समाजवादी पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़ने का सपना देख रहे हैं।
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अपने ही गढ़ में जब्त हो गई जमानत
साल 2019 में नगीना लोकसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर गिरिशचंद सांसद बने थे। इन पांच सालों में ऐसी तस्वीर बदली कि अब बहुजन समाज पार्टी को केवल 13 हजार वोट ही मिल सके। इस लोकसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के तीन-तीन विधायक हैं। ऐसे में यह सपा का गढ़ भी माना जाता है। फिर भी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मनोज कुमार अपनी जमानत नहीं बचा सके। दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
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