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गजब किस्सा: हार के लिए चुनाव लड़ते रहे धरती पकड़, हारने के बाद मिश्री से कराते थे लोगों का मीठा मुंह

Thu, 04 Apr 2024 04:59 PM IST
कपिल kapil विवेक गुप्ता, संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर

सार

Election : चुनाव का एक अजीबो-गरीब किस्सा सामने आया है। बिजनौर में धरती पकड़ हारने के लिए चुनाव लड़ते रहे हैं। खास बात यह है कि वे हारने के बाद मिश्री से लोगों का मीठा मुंह कराते थे।
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धरती पकड़ का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजनीतिक मामलों पर थोड़ी सी भी पकड़ रखने वाला इंसान धरती पकड़ से जरूर वाकिफ है। धरती पकड़ ऐसे अजीबो-गरीब उम्मीदवार रहे जो केवल हारने के लिए चुनाव लड़ते थे।

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जनपद बरेली के निवासी काका जोगेंद्र सिंह उर्फ धरती पकड़ ने 1993 में जनपद बिजनौर की सातों विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। वह विधायक से लेकर उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति तक का चुनाव भी लड़े।

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काका जोगिंदर सिंह का जन्म 1918 में गुजरांवाला (अब पाकिस्तान) में हुआ था। विभाजन के बाद वह बरेली में बस गए थे। 1962 से वह प्रत्येक चुनाव में दावेदारी ठोकते रहे। 350 से अधिक चुनाव लड़े, लेकिन किसी भी चुनाव में जीत हासिल नहीं की। बताया जाता है कि उनके चुनाव प्रचार करने का तरीका भी बिल्कुल जुदा था। वह साइकिल से प्रचार करते थे। खुद को वोट न देने की अपील करते थे। वह प्रचार के दौरान कहते थे कि चुनाव में खड़ा हूं, मुझे हरा देना। हार के बाद वह मिश्री से लोगों का मुंह भी मीठा कराते थे। उन्हें बारहमासी उम्मीदवार कहा जाता था। 

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वहीं, 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में काका जोगेंद्र सिंह उर्फ धरती पकड़ ने जनपद बिजनौर की सातों सीटों पर नामजदगी कराई थी। ऐसा नहीं है कि वह शून्य पर सिमट गए हों। प्रत्येक विधानसभा से उनकी झोली में मतदाताओं ने कुछ मत जरूर डाले। बिजनौर सदर सीट से उन्हें 246(0.2%), स्योहरा सीट से 173(0.1%), धामपुर सीट से 95(0.1%), अफजलगढ़ से 366(0.2%), नगीना से 114(0.1%), नजीबाबाद से 257(0.2%), और चांदपुर से 99(0.1%) मत प्राप्त हुए थे। उन्होंने विधायक सांसद के अतिरिक्त उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ा।

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