बिजनौर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से शिक्षामित्रों में आक्रोश है। गुस्साए शिक्षामित्रों ने बीएसए कार्यालय के सामने नेशनल हाईवे जाम किया तथा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का पुतला फूंका। हाईवे पर काफी देर तक हंगामा रहा। प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र तहसीलदार को सौंपा। बाद में बीएसए कार्यालय पर धरना दिया तथा समान कार्य समान वेतन की मांग की। हकों की लड़ाई के लिए शिक्षामित्रों ने बेमियादी हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है।
आदर्श समायोजित वेलफेयर एसोसिएशन के प्रांतीय प्रभारी सौरभ चौधरी व उप्र प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के प्रांतीय महामंत्री पुनीत चौधरी के आह्वान पर जिले के शिक्षामित्र समान कार्य समान वेतन की मांग को लेकर बुधवार से हड़ताल पर चले गए। पूर्वाह्न 11.30 बजे भारी संख्या में शिक्षा मित्र बीएसए कार्यालय पर एकत्रित हुए तथा धरना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में शिक्षामित्रों ने नेताओं के आह्वान पर बीएसए कार्यालय के सामने दिल्ली पौड़ी नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया और सीएम योगी आदित्यनाथ का पुतला फूंक कर सड़क पर बैठ गए। काफी देर बाद पुलिसबल व तहसीलदार मौके पर पहुंचे और वार्ता की और बहाली की मांग की गई है। बाद में शिक्षामित्रों ने बीएसए कार्यालय पर धरना दिया। धरने पर प्रांतीय प्रभारी सौरभ चौधरी, प्र्रांतीय महामंत्री पुनीत चौधरी, जिलाध्यक्ष सुधीर चौहान, मोहम्मद वाइज, सुचित मलिक, पोपेंद्र सिंह, अंजू सैनी, सना सैययद, जूनियर शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुधीर यादव, प्राथमिक शिक्षक संघ के मंत्री प्रशांत सिंह, दुष्यंत कुमार, प्रदीप धीमान सहित बड़ी संख्या में शिक्षा मित्र मौजूद रहे।
बेहद कम रही हाजिरी
नगीना। शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द होने की सूचना के बाद आज कोतवाली ब्लॉक के स्कूलों में तैनात शिक्षामित्रों की उपस्थिति बेहद कम रही। खंड शिक्षाधिकारी देशराज वत्स ने बताया कि उनके कोतवाली ब्लॉक में लगभग 435 शिक्षामित्र स्कूलों में तैनात हैं। शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द होने की सूचना पर ज्यादातर शिक्षामित्र बिजनौर विभागीय कार्यालय पर पहुंचने की सूचना उन्हें मिली है। वहीं हरियाली तीज के मौके पर महिलाओं का अवकाश होने के कारण स्कूल नहीं पहुंची। इसके कारण शिक्षण कार्य प्रभावित रहा। उन्होंने बताया कि शिक्षामित्रों के समायोजन के संबंध में क्या निर्णय होगा ,इसके लिए जिला स्तर पर विभागीय बैठक चल रही है।
जिले में गड़बड़ा जाएगी बेसिक शिक्षा
जिले में बीएसए ने तीन हजार शिक्षा मित्रों को प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों के पदों पर समायोजित किया था। समायोजित होने पर समायोजित शिक्षक खुश थे, पर मामला कोर्ट में जाने से समायोजित होने का फैसला खिलाफ चला गया। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला शिक्षा मित्रों के खिलाफ सुना दिया। इस निर्णय से लगभग तीन हजार शिक्षक प्रभावित होंगे।
यह संख्या कुल शिक्षकों का लगभग 40 प्रतिशत है। सुप्रीमकोर्ट के फैसला आने के बाद जिले के तीन हजार समायोजित शिक्षक हड़ताल पर चले गए हैं। शिक्षकों के हड़ताल पर जाने से प्राथमिक विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था गड़बड़ा जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग की माने तो जिले में काफी स्कूल ऐसे भी हैं जिनमें समायोजित शिक्षक ही तैनात हैं। ऐसे में इन स्कूलों में ताले लटक सकते हैं। शिक्षकों के हड़ताल पर जाने के कारण प्राइमरी स्कूलों में वर्ष 1999 की स्थिति दोहराने के कगार पर पहुंच गई है। तब जिले के स्कूल अधिकांश एकल थे। पर वर्ष 2000 में शिक्षा मित्रों की तैनाती होने से स्कूलों में बच्चों को शिक्षक मिले थे। पर अब फैसला खिलाफ होने से कई स्कूलों में ताले लटने की नौबत उत्पन्न हो गई है।