माटी कला देेश की प्राचीनतम शिल्पकला : ओमप्रकाश गोला
नजीबाबाद (बिजनौर)। उत्तर प्रदेश खादी माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश गोला ने कहा कि माटी कला देेश की प्राचीनतम शिल्पकला है। इस कला से जुड़कर न केवल हम संस्कृति से जुड़ते हैं, बल्कि कम खर्च पर अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।
नजीबाबाद के मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्र में प्राचार्य सोमप्रकाश की देखरेख में तीन दिवसीय माटी कला प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में सहारनपुर 15, बागपत 18, शामली 27 समेत कुल 60 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। शिविर के अंतिम दिन मुख्य अतिथि उप्र खादी माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश गोला ने प्रशिक्षणार्थियों द्वारा बनाए गए मिट्टी के उत्पादों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश में प्राचीन समय से माटी कला का प्रयोग किया जा रहा है। वर्तमान समय में मिट्टी से बने उत्पादों की काफी डिमांड है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के अंतर्गत हस्तनिर्मित उत्पादों से जुड़े वर्ग को भी प्रोत्साहित कर रही है। मास्टर ट्रेनर विकास प्रजापति ने प्रशिक्षणार्थियों को मिट्टी से बनाए जाने वाले उत्पादों में बरती जाने वाली सावधानी बताई। इसके बाद शिविर में शामिल 60 प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर ऋषिपाल प्रजापति, रामनिवास गोला, रजनीश प्रजापति, जोगेंद्र सिंह, एनएन शर्मा, गुंजन सिंह, विशाल कुमार, उमेश कुमार, रणवीर सिंह आदि मौजूद रहे।