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पीड़ितों की आवाज थे साहित्यकार दुष्यंत त्यागी

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पीड़ितों की आवाज थे साहित्यकार दुष्यंत त्यागी
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बिजनौर। महान साहित्यकार स्वर्गीय दुष्यंत त्यागी के जन्मदिवस पर रविवार को वर्चुअल अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का विषय ‘एक शाम कवियों के नाम’ रहा। देश भर के कवियों ने उन्हें याद किया और अपनी कविताओं के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
बिजनौर काव्य मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि दिल्ली मेट्रो प्रमुख मंगू सिंह ने दुष्यंत त्यागी को याद किया। कहा कि वे दलित, शोषित, पीड़ित की आवाज बनकर साहित्यकार के रूप में उभरे। उनके लिखे शेर और कविताएं राजनीतिक गलियारों में गूंजते हैं। मंच प्रमुख प्रदीप डेजी एवं युवा कवि शिवेंद्र कौशिक ने मंच संचालन में संयुक्त भूमिका निभाई। प्रदीप डेजी ने कहा, दुष्यंत जी जिंदगी में बहुत नाम कर गए, दुष्यंत जी जिंदगी पे ही एहसान कर गए। दुनिया में जिन के काम से सबको खुशी मिली, दुष्यंत जी साहित्य में वो काम कर गए। डॉ. विनोद ‘प्रसून’ ने कहा, बंधी है आज लेकिन कल बहेगी फिर हवाओं सी, लहर सी जिंदगी का यह पुराना जाब्ता सा है। बिखरते पल सिमेटो, हौसलों का हाथ बस थामो, कि इन हालात के आगे मुकम्मल रास्ता सा है। अजय जैन ने पढ़ा, मेरा दुश्मन मेरी सजा का तलबगार था। हो जाती सजा पर मुंसिफ ईमानदार था। दुश्मन ने गहरे तक घोंप दिए थे खंजर, बच गया क्योंकि ईश्वर मददगार था।
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कृष्ण कुमार पाठक ने कहा, ऊंचा है सर मां शारदे का जिस सपूत से। ऐसे चतुर चितेरे कलाकार हैं दुष्यंत जी। बिजनौर की माटी महकती आज भी जिससे, ऐसी अनूठी खुशबू के गुलजार हैं दुष्यंत जी। डॉ. अनिल शर्मा अनिल ने कहा, ऐ वतन के लाड़लों, कर कड़ा प्रहार दो, एक ही प्रहार में, शत्रुओं को मार दो। डॉ. वर्षा सिंह ने कहा, फूल कहे मकरंद से, मुझमें तेरी गंध। प्यार परस्पर बांटकर, महक रहे संबंध।
कार्यक्रम संयोजक राकेश जाखेटिया ने धन्यवाद किया। श्रोता के रूप में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयप्रकाश अग्रवाल, पूर्व सांसद एवं दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष व कृषि वैज्ञानिक मदन मोहन माहेश्वरी, सुप्रीम कोर्ट में वकील मनीषा शर्मा आदि शामिल रहे।
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साहित्यकार दुष्यंत के संस्मरण सुनाए
फोटो - 01एनजेडबी06ए, 06बी
नजीबाबाद। हिंदी पुरोधा गजल सम्राट दुष्यंत त्यागी के जन्मदिन पर उनके पैत्रिक गांव राजपुर नवादा में अतुल त्यागी के आवास पर संगोष्ठी आयोजित की गई। दुष्यंत जी के बाल सखा सत्य कुमार त्यागी के नेतृत्व में उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की गई। मुख्य अतिथि साहित्यकार एवं कहानीकार भोलानाथ त्यागी, वरिष्ठ कवि मनोज त्यागी ने दुष्यंत कुमार की साहित्य साधना को अविस्मरणीय बताया। देशबंधु त्यागी, अनिल त्यागी, अरस्तु त्यागी, राकेश त्यागी, अमन कुमार ने महान साहित्यकार दुष्यंत के संस्मरण सुनाए। मनोज त्यागी के संचालन में आयोजित संगोष्ठी में आलोक त्यागी, अभय देव, संजीव त्यागी सहित अनेक हिंदी साधकों ने भाग लिया।
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