बिजनौर। इमाम और उलेमा की बैठक में शादी में डीजे बजाने वाले और शराब पीने-पिलानों वालों के यहां निकाह नहीं पढ़ाने का फैैसला लिया।
इमाम और उलेमा ने इसे डीजे और शराब को इस्लाम का तरीका नहीं बताया। समाज से बुराइयों को दूर करने के लिए हर मस्जिद के क्षेत्र में दस व्यक्तियों की कमेटी बनाने का निर्णय लिया।
मस्जिद कुरैशियान में आयोजित बैठक में चाहशीरी स्थित जामा मस्जिद इमाम मौलाना अनवारुल हक ने कहा इस्लाम धर्म में गाना बजाना, बारात चढ़ाना, शराब पीने और पिलाने को हराम बताया, लेकिन फिर भी मुसलमानों में शादी के मौके पर शराब पीने-पिलाने, बारात चढ़ाने और डीजे बजाने का रिवाज बढ़ रहा है।
हमारे नबी गाने बजाने को दुनिया से दूर करने आए थे और अब मुसलमान ही गाने-बजाने को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा जिस शादी में डीजे बजेगा या बारात चढ़ेगी, शराब पी या पिलाई जाएगी, वहां पर कोई भी इमाम निकाह नहीं पढ़ेगा।
जमीयत उलेमा जिला सचिव कारी अरशद महमूद ने कहा इस्लाम में को इतना आसान बनाया है, जितना किसी अन्य मजहब ने नहीं बनाया है।
अब मुसलमानों ने ही निकाह को मुश्किल बना दिया। उन्होंने कहा शराब पीना या डीजे बजाना इस्लाम का नहीं बल्कि यहूदी और ईसाईयों का तरीका है। उन्होंने इसे रोकने के लिए हर मस्जिद क्षेत्र में दस व्यक्तियों की कमेटी गठित करने को कहा।
मिर्द गान स्थित जामा मस्जिद इमाम कारी अब्दुल हन्नान अवाम की सहायता से इमाम और उलेमा तमाम बुराइयों पर पाबंदी लगा सकते हैं।
इसमें मौलाना हसीनुद्दीन, मुफ्ती वकार अहमद, कारी शौकत ने विचार रखे। सदारत कारी अब्दुल हन्नान और निजामत मुफ्ती सलमान ने की।
इसमें कारी अब्दुल वाजिद, कारी सिकंदर, कारी इस्लामुद्दीन, कारी तारिक, हाफिज अतीकुर्रहमान, मुख्तार अहमद, वसीम अहमद उर्फ भोला, कारी शुऐब आदि रहे।