बिजनौर। सरकार की तरफ से दिव्यांग छात्राओं को छात्रवृत्ति के तौर पर प्रतिवर्ष दो हजार रुपये दिए जा रहे हैं। जिले में 100 दिव्यांग छात्राओं को यह छात्रवृत्ति दिलाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से करीब 80 के आवेदन आ चुके हैं। इसमें कुछ के दिव्यांग सर्टिफिकेट न मिल पाने के कारण लाभ नहीं मिला है।
शिक्षा विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इसका लाभ केवल प्राथमिक और जूनियर स्कूल में पढ़ने वाली दिव्यांग छात्राओं को मिलेगा। इसके साथ ही यह स्टाइपेंड केवल 7 से 14 वर्ष की छात्राओं को मिलेगा। स्टाइपेंड 10 महीने के लिए ही मान्य होगा। कक्षा एक से आठ तक पढ़ने वाली दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए ये स्टाइपेंड दिया जाता है, जिससे छात्राएं छात्रवृत्ति के दो हजार रुपयों को अपनी पढ़ाई का सामान आदि खरीद सकें। इसका लाभ लेने के लिए छात्राओं के पास 40 फीसदी तक का दिव्यांग सर्टिफिकेट होना चाहिए। इसके लिए मेडिकल बोर्ड या मुख्य चिकित्सा अधिकारी से जारी प्रमाणपत्र ही मान्य होगा।
बेसिक शिक्षा अधिकारी जयकरन यादव ने बताया कि दिव्यांग छात्राओं को प्रतिवर्ष दो हजार रुपये स्टाइपेंड के तौर पर दिए जाएंगे, जिससे पढ़ाई में उनकी सहायता हो सकेगी। इसके साथ ही कुछ छात्राओं को यह छात्रवृत्ति दे दी गई है। वहीं कुछ छात्राओं के पास मुख्य चिकित्सा अधिकारी के द्वारा जारी प्रमाणपत्र न होने के कारण छात्रवृत्ति नहीं मिली है। जिला समन्वयक लियाकत अली ने बताया कि जिले में सात जगह मेडिकल कैंप लगाए गए थे, जिनमें करीब 300 दिव्यांगों के प्रमाणपत्र बनवाए गए हैं।